कब है नारद जयंती 2026? सही तारीख, पूजा करने का तरीका और इसका महत्व जानिए

नारद जयंती 2026 की तिथि और पूजा विधि को लेकर लोगों में उत्साह है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और सफलता मिलती है, जानिए सही मुहूर्त और सरल पूजा विधि।
कब है नारद जयंती 2026

जब भी नारायण-नारायण की आवाज सुनाई देती है, मन अपने आप भक्ति में डूब जाता है। देवर्षि नारद का नाम ही ऐसा है, जो भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति की याद दिलाता है। साल में एक बार आने वाली नारद जयंती सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि भगवान के प्रति समर्पण और सच्ची श्रद्धा का दिन होती है।

नारद जयंती 2026 को लेकर भक्तों में खास उत्साह है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल मिलता है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। यही वजह है कि इस दिन पूजा करने का महत्व और भी बढ़ जाता है।

नारद जयंती 2026 कब है

नारद जयंती 2026 की तिथि को लेकर काफी लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह पर्व किस दिन मनाया जाएगा। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 1 मई की रात 10 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 3 मई की रात 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगी।

उदया तिथि के अनुसार नारद जयंती शनिवार, 2 मई 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं, जो पूजा के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 14 मिनट से 4 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जो पूजा शुरू करने के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है।

अभिजित मुहूर्त दोपहर में रहेगा, जबकि गोधूलि मुहूर्त शाम के समय पूजा के लिए शुभ रहेगा। इस तरह नारद जयंती 2026 पूरे दिन भक्ति और पूजा के लिए अनुकूल अवसर लेकर आ रही है।

नारद जयंती पूजा विधि: सरल तरीके से करें आराधना

नारद जयंती 2026 पर पूजा करना बहुत कठिन नहीं है। इसे कोई भी व्यक्ति सरल तरीके से कर सकता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनकर भगवान के सामने बैठें। मन में संकल्प लें कि आप पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करेंगे।

सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, क्योंकि देवर्षि नारद उनके परम भक्त माने जाते हैं। भगवान विष्णु को चंदन, कुमकुम और ताजे फूल अर्पित करें। इसके बाद देवर्षि नारद की पूजा करें और उनसे आशीर्वाद मांगें।

भगवान विष्णु को भोग में पंचामृत, फल या घी से बना हलवा चढ़ाया जा सकता है। इस बात का खास ध्यान रखें कि भोग में तुलसी दल जरूर शामिल हो, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। पूजा के अंत में भगवान विष्णु और नारद मुनि की आरती करें और परिवार की खुशहाली की कामना करें।

नारद जयंती का महत्व और मिलने वाला फल

नारद जयंती 2026 का महत्व बहुत खास माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। जो लोग अपने जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन की गई पूजा से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नारद मुनि को देवताओं और मनुष्यों के बीच संदेशवाहक माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से भगवान तक अपनी बात पहुंचाने का मार्ग आसान होता है।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

Bhawna Choubey
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