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जून में इस दिन रखा जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत, करें ये काम, शुभ फलों की होगी प्राप्ती

Written by:Sanjucta Pandit
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मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। इसके साथ ही भक्तों के पापों का अंत भी होता है। मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जून में इस दिन रखा जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत, करें ये काम, शुभ फलों की होगी प्राप्ती

सनातन धर्म में एकादशी महत्वपूर्ण व्रत में से एक है, जिसे रखने से जातक के जीवन की सारी समस्याएं खत्म हो जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कुछ लोग पूरे दिन पीले वस्त्र धारण करके रखते हैं, जो कि बहुत ही शुभ माना जाता है। साल भर में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं, लेकिन अधिक मांस होने पर इसकी संख्या 26 हो जाती है। अक्सर सभी समस्याओं से छूटकारा पाने के लिए जातक इस व्रत को रखते हैं।

एकादशी का व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष को रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। इसके साथ ही भक्तों के पापों का अंत भी होता है। मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी 6 जून को रात 2:15 पर शुरू होगी। जिसका समापन अगले दिन यानी 7 जून को सुबह 4:47 पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, 6 जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा।

पारण का समय

व्रत पारण के शुभ मुहूर्त की बात करें, तो ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि पर पारण किया जाता है। ऐसे में निर्जला एकादशी का पारण 7 जून को किया जाएगा। जिसका शुभ मुहूर्त दोपहर 1:44 से लेकर शाम 4:00:31 तक है।

पौराणिक कथा

निर्जला व्रत को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार, भीमसेन ने वेदव्यास जी से पूछा था कि कोई ऐसा मार्ग बताइए जिससे वह स्वर्ग पहुंच जाए, तब वेदव्यास जी ने भीमसेन को ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष में पढ़ने वाली एकादशी व्रत को करने की सलाह दी थी। तब उन्होंने विधिपूर्वक इस व्रत का पालन किया। जल और अन्न का त्याग किया, तब उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई, तब से ही निर्जला एकादशी व्रत रखा जाने लगा।

करें ये काम

  • इस दिन जातक को व्रत रखने के दौरान दूध, दही, फल, शरबत, साबूदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च, सेंधा नमक, राजगीर का आटा, आदि का सेवन करना चाहिए।
  • पूजा के बाद साफ जल और साफ बर्तन में ही कुछ भी खाएं।

ना करें ये काम

  • इस व्रत को रखने से पहले या फिर उसी दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • इससे व्रत असफल माना जाएगा।
  • इस व्रत को करने वाले साधक को चावल और नमक का सेवन भी करना वर्जित माना गया है।

उपाय

  • इस दिन पीला वस्त्र पहनकर पूजा पाठ करें। पीले रंग का भोग लगाएं और पीला फूल ही भगवान विष्णु को अर्पित करें।
  • इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु के समक्ष 9 बाती का दीपक जलाएं। इससे घर में सुख शांति बनी रहेगी।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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