Puja Path Niyam: भगवान पर चढ़े फूलों को फेंके नहीं करें ये काम, बनी रहेगी देवी-देवताओं की कृपा

भगवान पर चढ़े फूलों को कहीं भी फेंकना अशुभ माना जाता है। आप इन फूलों को अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।
puja path niyam

Puja Path Niyam: देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए लोग विभिन्न प्रकार के फूलों को अर्पित करते हैं। हिन्दू धर्म में फूलों के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। लेकिन पूजा समाप्त होने के बाद कई लोगों फूलों को बेकार समझकर इधर-उधर फेंकने लगते हैं। ऐसा करना ईश्वर का अपमान समझा जाता है। भगवान पर चढ़े फूलों को विसर्जित करने का भी नियम होता है। इसके अलावा आप इन फूलों का उपयोग अलग-अलग तरीके से कर सकते हैं।

मंदिर से लाए फूलों को नदी में करें प्रवाहित

भगवान को चढ़े फूलों को नदी में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है। आप इन फूलों को पुष्पांजलि के रूप में नदियों में प्रवाहित कर सकते हैं। ऐसा करने से लाभ होता है। नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ता।

पौधों के लिए खाद बनाएं

पूजा के बाद आप फूलों को बगीचे की मिट्टी या गमले में डाल सकते हैं। ऐसा करने से फूल बर्बाद नहीं होते हैं। कुछ दिनों में खाद बनर पौधों के विकास में मदद करते हैं।

तिजोरी में रखें

भगवान पर चढ़े फूलों को तिजोरी या धन से स्थान पर रखना शुभ माना जाता है। इन फूलों को अच्छी तरह से सुखाकर किसी कागज या पीले कपड़े में लपेट कर तिजोरी या धन के स्थान पर रख दें। ऐसा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।

हवन समाग्री बनाएं

देवी-देवताओं पर चढ़े हुए फूलों से आप हवन समाग्री भी बना सकते हैं। फूलों को सुखाकर इसमें घी, गुड़, जौं, कपूर, गुग्गल और काला तिल डालकर हवन समाग्री या धूप बना सकते हैं।

(Disclaimer: इस आलेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी साझा करना है, जो ग्रंथों, मान्यताओं और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। MP Breaking News इन बातों के सत्यता और सटीकता की पुष्टि नहीं करता।)

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews