Puja Path Niyam: मौली धागा बांधते हैं तो जान लें ये नियम, रखें इन बातों का खास ख्याल, बरसेगी देवी-देवताओं की कृपा

मौली धागा यानि कलावा बांधते समय कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। विधि के अनुसार कालवा न बांधने पर त्रिदेवना राज भी हो सकते हैं।
kalawa rules

Puja Path Niyam: हिन्दू धर्म में कलावा यानि मौली धागे का विशेष महत्व होता है। इसे रक्षा सूत्र के तौर पर लोग धरण करते हैं। मान्यताएं हैं इसे हाथ पर बांधते से जीवन के संकट से रक्षा होती है। हाथ पर कलावा बांधने से त्रिदेव का आशीर्वाद भी मिलता है। विज्ञान में भी मौली सूत्र का विशेष महत्व होता है। यह नसों को नियंत्रित करता है। पाचन तंत्र को सुधारता है और ब्लड प्रेशर को भी संतुलित रखने में मदद करता है। शास्त्रों में मौली धागे से संबंधित कुछ नियमों का उउल्लेख्य किया गया है। जिसका पालन करना जरूरी होता है-

कलावा बांधते समय करें इन नियमों का पालन 

  • कुंवारी लड़कियों और पुरुषों को कलावा हमेशा दाहिने हाथ में बांधना चाहिए। विवाहित स्त्रियों को मौली धागा बाएं हाथ में बांधना चाहिए।
  • कालवा बांधते समय हाथ में सिक्का या रुपया लेकर मुट्ठी कर लें।
  • हाथ में मौली धागे को 3,5 या 7 बार लपेटना चाहिए।
  • येन बध्दो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चला मा चल” मंत्र का जाप करें।

कब बांधना चाहिए कलावा?

मंगलवार और शनिवार के दिन मौली धागा बांधना शुभ होता है। इस दिन पुराने कलावा को उतारकर नया भी पहन सकते हैं। इसके अलावा संक्रांति के दिन, यज्ञ की शुरुआत विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के दौरा मौली धागा बांधना चाहिए।

मौली धागा उतारने के नियम 

मौली धागा उतारने के बाद दूसरा रक्षा सूत्र बांध बांध लें। उतारे हुए कलावा को पानी में प्रवाहित कर देना चाहिए। आप इसे पीपल पेड़ के  नीचे भी रख सकतेह हैं।

(Disclaimer: इस आलेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी साझा करना है, जो ग्रंथों, मान्यताओं और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। MP Breaking News इन बातों के सत्यता और सटीकता की पुष्टि नहीं करता।)

Manisha Kumari Pandey
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