
Sawan Pradosh Vrat: श्रावण मास भगवान शिव का प्रिय महीना होता है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण त्योहार पड़ रहे हैं, जिसमें से एक प्रदोष व्रत है। प्रदोष व्रत भी भगवान शिव को भोलेनाथ को समर्पित होता है। इस दिन विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। 1 अगस्त को श्रावण मास का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन कुछ उपायों को करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा करने से महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। जीवन के कष्ट दूर होते हैं। सफलता के योग बनते हैं।
आजमाएं ये उपाय
- सावन प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का श्रृंगार शमी के पत्तों से करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। धन-धान्य में वृद्धि के योग बनते हैं।
- सावन प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग के सामने गिया तिल या घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा बरसती है। पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
- वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए सावन के पहले प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर दो गुलाब के फूल चढ़ाएं। ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है। रिश्ते और भी मजबूत होते हैं।
- कुंडली में ग्रहों को मजबूत बनाने और ग्रह दोष से मुक्ति पाने के लिए सावन के पहले प्रदोष व्रत के दिन आटे के दिए आटे के दीपक में तेज पत्ता का चूरा, तेल और लौंग डालकर जलाएं।
ऐसे करें पूजा
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। इस दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
- घर के मंदिरया पूजा स्थल की साफ-सफाई करें गंगाजल का छिड़काव करें। भगवान शिव और माता पार्वती को प्रणाम कर व्रत का संकल्प लें।
- सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- शाम के समय शाम के समय एक चौकी पर शिव परिवार की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें
- भगवान शिव और गणेश को चंदन का तिलक लगाएँ। माता पार्वती को सिंदूर का तिलक लगाएँ।
- बेलपत्र, फूल, धतूरा इत्यादि अर्पित करें। घी का दीपक प्रज्वलित करें। भोग अर्पित करें।
- शिव चालीसा का पाठ करें। पूजा का समापन आरती के साथ करें और भोग का वितरण करें।
मुहूर्त और योग
सावन के पहले प्रदोष व्रत की शुरुआत 1 अगस्त दोपहर 3:28 बजे होगी। इसका समापन 2 अगस्त दोपहर 3:26 बजे होगा। उदय तिथि के अनुसार 1 अगस्त को व्रत रखा जाएगा। इस दिन मार्गशिरा और आद्र नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा शिव वास और हर्षद योग बन रहे हैं।
(Disclaimer: इस आलेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी साझा करना है, जो पंचांग, ग्रंथों , मान्यताओं और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। MP Breaking News इन बातों के सत्यता और सटीकता की पुष्टि नहीं करता।)
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