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इस शुभ मुहूर्त में करें शरद पूर्णिमा का दान, जानें पूजन विधि और महत्व

Written by:Diksha Bhanupriy
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दशहरा के बाद शरद पूर्णिमा का व्रत आता है, जिसका काफी महत्व माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजन की जाती है। चलिए इस बारे में जान लेते हैं।
इस शुभ मुहूर्त में करें शरद पूर्णिमा का दान, जानें पूजन विधि और महत्व

शरद पूर्णिमा (Sharad purnima 2025) के पर्व का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना गया है। दशहरा के बाद अश्विन मास के आखिरी दिन यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन दोनों स्वयं धरती पर भ्रमण करने के लिए आते हैं।

शरद पूर्णिमा के बाद कार्तिक का महीना शुरू होता है। जिसमें धनतेरस और दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है। इस साल 6 अक्टूबर को पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाने वाला है। इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र है और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग भी निर्मित हो रहा है। यह नक्षत्र और योग मिलकर इस पर्व को शुभ बनाने का काम कर रहे हैं। चलिए आपको इस दिन के शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में बताते हैं।

कब है शरद पूर्णिमा का व्रत (Sharad Purnima 2025)

इस साल पूर्णिमा की शुरुआत 6 अक्टूबर के सुबह 11:02 से होगी और यह 7 अक्टूबर को दोपहर 1:37 पर खत्म होगी। हालांकि चंद्र पूजन शाम के समय होता है इसलिए से 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा

स्नान दान का समय

शरद पूर्णिमा के मौके पर स्नान दान का बहुत महत्व माना गया है। इस इन ए ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:39 से 5:28 तक, उन्नति मुहूर्त में 10:41 से 12:09 तक और अमृत मुहूर्त में 12:09 से 1:37 तक स्नान दान कर सकते हैं।

जान लें पूजन विधि

  • इस दिन किसी पवित्र नदी, तालाब या फिर घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • अब आपको स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत और पूजा का संकल्प लेना है।
  • इस दिन भगवान विष्णु माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजन की जाती है।
  • भगवान को सुंदर से वस्त्र, हार, फूल, रोली, अक्षत, धूप, दीप अर्पित करें।
  • आपको भोग के लिए गाय के दूध से खीर बनाकर तैयार करनी चाहिए।
  • इस दौरान चंद्र देव को अर्घ्य देना ना भूलें। इस दौरान दूध, चावल और सफेद फूल जल में अवश्य मिलाएं।
  • आपने जो भोग भगवान को लगाया है अगले दिन सूर्योदय से पहले उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
  • अन्ना, चावल, दूध, वस्त्र, मिठाई और दक्षिणा का दान जरूर करें।

शरद पूर्णिमा का महत्व

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत पास होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस तिथि पर अगर चंद्रमा की चांदनी में खीर या दूध रखा जाता है तो वह अमृत के समान हो जाता है। जब इस प्रसाद को ग्रहण किया जाता है तो व्यक्ति को निरोगी काया की प्राप्ति होती है।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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