वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी से रूप में मनाया जाता है। इस दिन को माता जानकी के प्राकट्य दिवस के रूप में पहचाना जाता है। इस साल 25 अप्रैल शनिवार यानी आज यह पर्व मनाया जा रहा है। चलिए पूजा का शुभ मुहूर्त और सही विधि जान लेते हैं ताकि शुभ परिणाम प्राप्त किया जा सके।
वैशाख का महीना वैसे भी बहुत शुभ माना गया है। इस समय में की गई पूजा, पाठ और दान-धर्म व्यक्ति के जीवन में खुशहाली लेकर आता है। अगर आप माता-पिता और भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त में सही विधि से पूजा पाठ कर सकते हैं। चलिए इस बारे में जानते हैं।
सीता नवमी का शुभ मुहूर्त
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 24 अप्रैल को शाम 7:21 पर हो चुकी है। इसका समापन 25 अप्रैल को शाम 6:27 पर होगा। चलिए आपको पूजा के मुहूर्त के बारे में बता देते हैं।
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11:01 से दोपहर 1: 38 मिनट तक है। अगर दोपहर में पूजा करना चाहते हैं तो यह समय 12:19 से है।
कैसे करें पूजा
- सुबह जल्दी उठकर स्नान कर माता सीता का ध्यान कर आपको व्रत का संकल्प लेना है।
- अब अपने घर के मंदिर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर माता सीता और प्रभु श्री राम की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- अब आपको माता जानकी और भगवान राम को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करना है। इस दौरान माता सीता को सोलह श्रृंगार की सामग्री जरूर अर्पित करें।
- अब आपको माता जानकी को सिंदूर अर्पित करना है और इसे प्रसाद स्वरूप अपने माथे पर लगाना है। शादीशुदा महिलाएं इसे मांग में लगा सकती हैं क्योंकि ये अखंड सौभाग्य का प्रतीक होता है।
- अब रोली, चावल और धूप-दीप जलाकर माता सीता को ताजे फल और मिठाई अर्पित करें।
- इस दौरान सीता चालीसा का पाठ कर मंत्रों का जाप जरुर करें।
- अब आपको घी का दीपक जलाकर माता सीता और भगवान राम की आरती करनी है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।






