Hindi News

न दीवार, न सहारा… फिर भी सदियों से 1000 स्तंभों पर टिका है ये मंदिर, यहां सूर्यदेव की होती है विशेष पूजा

Written by:Bhawna Choubey
Published:
तेलंगाना के हनमकोंडा में स्थित 1000 स्तंभों वाला रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला, बिना दीवारों की बनावट और सूर्यदेव की उपासना के लिए प्रसिद्ध है। जानिए इस अद्भुत मंदिर का इतिहास, रहस्य और धार्मिक महत्व।
न दीवार, न सहारा… फिर भी सदियों से 1000 स्तंभों पर टिका है ये मंदिर, यहां सूर्यदेव की होती है विशेष पूजा

सोचिए, आप किसी ऐसे मंदिर के सामने खड़े हैं जो दीवारों पर नहीं, बल्कि स्तंभों पर टिका हो। जहां चारों ओर पत्थर की जाली और नक्काशी हो, लेकिन पारंपरिक दीवारें दिखाई न दें। जहां हर स्तंभ खुद में एक कहानी कहता हो। ऐसा दृश्य किसी फिल्म का नहीं, बल्कि हकीकत है।

दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य में मौजूद रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर को लोग 1000 स्तंभों वाला मंदिर भी कहते हैं। यह मंदिर सिर्फ अपनी भव्यता के लिए नहीं, बल्कि अपनी अनोखी बनावट और सूर्यदेव की विशेष पूजा के लिए भी जाना जाता है।

कहां है यह 1000 स्तंभों वाला मंदिर?

यह अद्भुत मंदिर तेलंगाना के ऐतिहासिक शहर हनमकोंडा में स्थित है। यह जगह कभी काकतीय राजाओं की राजधानी हुआ करती थी। आज भी यहां की मिट्टी में इतिहास की खुशबू मिलती है।

रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर दूर से ही अपने पत्थर के स्तंभों और कलाकृति से ध्यान खींच लेता है। जैसे ही आप मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं, सबसे पहले नजर पड़ती है विशाल नंदी की प्रतिमा पर, जो काले बेसाल्ट पत्थर से बनी है और बेहद सुंदर नक्काशी से सजी है।

1000 स्तंभों पर टिका मंदिर

रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है, इसका “दीवारों के बिना” बना होना। इसका मतलब यह नहीं कि यहां बिल्कुल भी संरचना नहीं है, बल्कि इसकी बनावट ऐसी है कि हजारों स्तंभ ही दीवारों का काम करते हैं।

कहा जाता है कि इस मंदिर में करीब 1000 स्तंभ हैं। हर स्तंभ अलग डिजाइन का है। कोई भी दो स्तंभ पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। यही कारण है कि इसे 1000 स्तंभों वाला मंदिर कहा जाता है। कुछ स्तंभ इतने पास-पास बने हैं कि देखने में लगता है जैसे दीवार हो, लेकिन असल में वे स्तंभ ही हैं। यही वजह है कि यह मंदिर वास्तुकला का अनोखा नमूना माना जाता है।

एक ही मंदिर में तीन देवता

  • भगवान शिव
  • भगवान विष्णु
  • और सूर्यदेव
  • आमतौर पर सूर्यदेव के अलग मंदिर मिलते हैं, लेकिन यहां उन्हें शिव और विष्णु के साथ स्थान दिया गया है। यही कारण है कि यह मंदिर सूर्यदेव की उपासना का भी प्रमुख स्थल माना जाता है।

12वीं शताब्दी का इतिहास

इस भव्य मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजा रुद्रदेव ने करवाया था। माना जाता है कि यह मंदिर 1163 ईस्वी के आसपास बनकर तैयार हुआ। राजा रुद्रदेव शिव भक्त थे, इसलिए उन्होंने अपने आराध्य भगवान के लिए यह भव्य मंदिर बनवाया। उनके नाम पर ही इसे रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर कहा गया। मंदिर की वास्तुकला में चालुक्य शैली की झलक मिलती है। पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी, मूर्तियों की सुंदरता और स्तंभों की कलाकारी आज भी लोगों को हैरान कर देती है।

विशाल नंदी और अद्भुत नक्काशी

मंदिर परिसर में स्थित नंदी महाराज की प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह प्रतिमा एक ही पत्थर से बनाई गई है। इसकी चमक और चिकनाई देखकर लगता है जैसे आज ही तराशी गई हो। इसके अलावा मंदिर की दीवारों, छतों और स्तंभों पर देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और पौराणिक कथाओं की सुंदर नक्काशी की गई है। हर कोना कला का जीता-जागता उदाहरण है।

 

मध्य प्रदेश से जुड़ी विश्वसनीय और ताज़ा खबरें MP Breaking News in Hindi यहां आपको मिलती है MP News के साथ साथ लगातार अपडेट, राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की सटीक जानकारी। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और अपडेटेड रहें !
Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
Follow Us :GoogleNews