मप्र-उप्र बॉर्डर पर मजदूरों का हंगामा, बैरिकेड तोड़ किया प्रवेश

मप्र-उप्र बॉर्डर पर मजदूरों का हंगामा, बैरिकेड तोड़ किया प्रवेश

रीवा| लॉक डाउन (Lockdown) के बीच मजदूरों (Migrant Workers) की घर वापसी का दौर जारी है| लेकिन इस वापसी में मजदूरों को कई संकट से भी गुजरना पड़ रहा है| कई मजदूर हादसे के शिकार भी हो चुके हैं| वहीं अव्यवस्थाओं के कारण मजदूरों का सब्र भी टूट रहा है और प्रदेश की सीमा पर रोके जाने से लगातार मजदूरों के हंगामे के मामले सामने आ रहे हैं| रविवार को रीवा (Rewa) में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा (MP-UP Border) पर लगे हुए चाकघाट के पास मजदूरों ने जमकर हंगामा किया| इस दौरान स्तिथि को सँभालने पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया। मजदूरों ने बॉर्डर पर लगे बैरिकेड तोड़कर उत्‍तर प्रदेश की सीमा में जबरदस्‍ती प्रवेश कर लिया|

दरअसल, मध्य प्रदेश से होकर अन्य राज्यों को जाने वाले मजदूरों को लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख चुके हैं| इस बीच सीमाओं पर मजदूरों रोके जाने से विवाद की स्थिति बन रही है| रीवा में रविवार को प्रवासी मजदूरों ने जमकर हंगामा मचाया| उत्तर प्रदेश से बसें न आने को लेकर मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया और जाम लगा दिया| नाराज श्रमिकों ने पुलिस दल पर पथराव शुरू कर दिया जिन्हें रोकने को लेकर बल प्रयोग किया गया।

रीवा के चाकघाट क्षेत्र में हजारों की संख्‍या में प्रवासी मजदूर बेकाबू हो गए और उन्‍होंने दोनों राज्‍यों ( उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश) के बॉर्डर पर लगे बैरिकेड तोड़कर उत्‍तर प्रदेश की सीमा में जबरदस्‍ती प्रवेश कर लिया|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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