अब ‘चरणवंदना’ करने वाले पुलिसकर्मियों की खैर नही…होगी कार्रवाई

अब ‘चरणवंदना’ करने वाले पुलिसकर्मियों की खैर नही…होगी कार्रवाई

रीवा।

वरिष्ठ अधिकारियों की नजरों में अपने नंबर बढाने और इमेज चमकाने के लिए चाटुकारिता करने वाले पुलिसकर्मियों की अब खैर नही है। अगर अब कोई पुलिसकर्मी किसी अधिकारी के पैर छूते या फिर दंडवत प्रणाम करते हुए नजर आया तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।रीवा आईजी चंचल शेखर आईजी ने इसको लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। आईजी ने पुलिसकर्मियों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को अभिवादन स्वरूप चरण स्पर्श जैसे शब्दों के बोलने पर रोक लगा दी है, वही उल्लघंन करने वालों पर कार्रवाई की बात कही है।

दरअसल, रीवा आईजी चंचल शेखर ने वर्दी पहनकर पैर छूने और फोन में चर्चा करने के पहले और बाद में चरण स्पर्श जैसे शब्द पर रोक लगा दी है।इसके बदले आईजी ने नमस्कार ,जय हिंद, गुड मॉर्निंग, गुड इवनिंग जैसे शब्दों के प्रयोग करने को कहा है। रीवा आईजी चंचल शेखर ने संभाग के सभी पुलिस अधीक्षकों को इसका पालन कराने के लिए निर्देश जारी कि है और उल्लंघन करने पर कार्रवाई करने की बात कही है।खास बात ये है कि चंचल शेखर पहली आईजी ने जिन्होंने ऐसे करने पर सीधा रोक लगा दी है और कार्रवाई की बात कही है।

बता दे कि राजनीति और अफसरशाही में चरणवंदना का इतिहास पुराना है, जहां समर्थकों को अपने नेताओं के चरण वंदना करते हुए कई बार देखा गया है वही पुलिसकर्मी भी इसमें पीछे नही है। मीडिया में कई बार ऐसे तस्वीरे वायरल हुई है जिसको लेकर खूब बवाल भी मचा है, यहां तक की कई पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के लिए तबादलें भी हो गए है, लेकिन सिलसिला जारी है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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