रीवा में सड़क न होने की कीमत जान देकर चुकाई! 2KM तक खटिया पर ढोते रहे परिजन, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत

रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र में सड़क की कमी एक महिला के लिए जानलेवा साबित हुई। गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकी, इसलिए परिजन और ग्रामीण बीमार महिला को खटिया पर करीब दो किलोमीटर तक पैदल लेकर चले।
रीवा में सड़क न होने की कीमत जान देकर चुकाई

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सामने आई यह घटना विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सड़क न होने की वजह से एक बीमार महिला को समय पर इलाज नहीं मिल सका। परिजन उसे खटिया पर लिटाकर मुख्य सड़क तक ले जाने की कोशिश करते रहे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में गम और नाराजगी का माहौल है।

एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंची

यह मामला रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नदना (डिहिया) का है। जानकारी के मुताबिक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। परिवार ने उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एम्बुलेंस अंदर नहीं आ सकी। ऐसे में ग्रामीणों ने महिला को खटिया पर लिटाया और करीब दो किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क की ओर चल पड़े, ताकि वहां से किसी वाहन की मदद मिल सके।

हालांकि, इलाज मिलने से पहले ही महिला ने रास्ते में दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। परिजनों का कहना है कि अगर गांव तक सड़क होती और एम्बुलेंस समय पर पहुंच जाती, तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर कर दिया है।

व्यवस्था की नाकामी का सवाल बना

ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क निर्माण की मंजूरी काफी पहले मिल चुकी थी, लेकिन आज तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों की लापरवाही और काम में देरी की वजह से गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। बरसात के दिनों में हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं, जिससे बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब गांव में सड़क की कमी के कारण लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा हो। कई बार मरीजों को खटिया या अन्य अस्थायी साधनों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। इस बार यह मजबूरी एक महिला की जान पर भारी पड़ गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव तक जल्द से जल्द सड़क बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों।

स्वास्थ्य सुविधाएं आज भी बड़ी चुनौती

यह घटना सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उन कई ग्रामीण इलाकों की तस्वीर दिखाती है जहां आज भी सड़क और स्वास्थ्य सेवाएं लोगों की पहुंच से दूर हैं। सरकारें लगातार ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के दावे करती हैं, लेकिन कई गांवों में जमीनी हालात अब भी अलग नजर आते हैं। सड़क नहीं होने का असर केवल आवाजाही पर नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और सबसे अहम आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी गांव के विकास की पहली शर्त बेहतर सड़क और समय पर चिकित्सा सुविधा होती है। यदि गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, तो किसी भी गंभीर मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है। रीवा की यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी की तरह है कि केवल योजनाओं की घोषणा काफी नहीं, बल्कि उनका समय पर जमीन पर उतरना भी उतना ही जरूरी है। फिलहाल ग्रामीण महिला की मौत के बाद जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब और गांव में जल्द सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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