Alert: जर्जर भवन दे रहे बड़े हादसे की चेतवानी, काम में जुटा निगम प्रशासन

Alert: जर्जर भवन दे रहे बड़े हादसे की चेतवानी, काम में जुटा निगम प्रशासन

सतना।पुष्पराज सिंह बघेल

बरसात में स्मार्ट सिटी सतना में निगम के पुराने भवन बड़े हादसे का सबब बन सकते है।हाल ही में सतना बस स्टैंड की 30 वर्ष पुरानी जर्जर दुकानो के छज्जे पिछले दो बार से गिर रहे है। हफ्ते भर पहले जहाँ छज्जा गिरने से एक दर्जन वाहनों को छति पहुँची थी तो आज फिर छज्जा धरासाई होने पर दुकान के बाहर रखा सामान चपेट में आ गया। गनीमत रही कि दोनों बार ही कोई जन हानि नही हुई।

इस घटना से पहले अगर नगर निगम नींद से जागा होता और जर्जर भवनों को गिराने की कार्यवाही की होती तो ऐसी छति नहीं होती ।शहर में जर्जर भवनों को लेकर निगम की जबावदेही है कि वो बरसात के पहले ही जर्जर भवनों को गिराने की कवायद करे ताकि किसी बड़ी जन हानि से बचा जा सके लेकिन स्मार्ट सिटी सतना में जर्जर भवनों में लोग भगवान भरोसे ही है।

दुकानो के बाहर छज्जा गिरने का ये हादसा सतना शहर के बस स्टैंड का है जहाँ ये हफ्ते भर के अंदर दूसरी घटना है।इसके पहले गिरे छज्जे की चपेट में एक दर्जन गाड़ियों का नुकसान हुआ था।और फिर आज वही घटना दुबारा हुई जिसमें दुकानो के बाहर रखा सामान टूट फुट गया। गनीमत है कि दोनो बार हुए हादसे में कोई जन हानि नहीं हुई ,लॉक डाउन के चलते जहां बसो का संचालन बंद है और बस स्टैंड में इन दिनों भीड़भाड़ नही रहती है वार्ना  बडा हादसा हो सकता था।बहरहाल देर सबेर ही सही दो बार हादसे के बाद निगम प्रशासन नींद से जागा है और अब छज्जा गिराने की रस्म अदायगी में जुट गया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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