चचेरे भाई ने ही किया था मासूम का अपहरण, 5 लाख की मांगी थी फिरौती, गिरफ्तार

चचेरे भाई ने ही किया था मासूम का अपहरण, 5 लाख की मांगी थी फिरौती, गिरफ्तार

सतना|पुष्पराज सिंह बघेल| समाज मे नशा और नशे के लिए पैसा अपनो की जान का दुश्मन बन बैठा है।मध्य प्रदेश के सतना में ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ नशे की लत के चलते  कर्ज में डूबे चचरे भाई ने 3 साल के मासूम का ही अपहरण कर लिया। इस काम में उसने अपने एक दोस्त को भी शामिल कर लिया।शनिवार शाम 3 साल के मासूम का अपरहण कर परिवार से 5 लाख की फिरौती मांगी मगर इससे पहले की वो अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते पुलिस उन तक पहुँच गई और अपहरण कर्ताओ को हिरासत में ले लिया इस घटना में पुलिस ने न सिर्फ नशे के आदी अपहरण कर्ताओ को हिरासत में लिया बल्कि नशे के कारोबारी को भी गिरफ्तार कर लिया है।

शनिवार की शाम कोलगवां थाना अंतर्गत नई बस्ती में उसवक्त हडकंम्प मच गया जब एक तीन साल का मासूम अचानक घर के पास से लापता हो गया परिजनों ने आसपास तलाश कर फ़ौरन पुलिस को सूचना दी।कुछ घंटे बीत जाने के बाद जब अपहरण कर्ताओ ने फ़ोन कर 5 लाख फिरौती की माँग की तब पता चला  की 3 साल के मासूम अभय का अपहरण किया जा चुका है। लेकिन सतना पुलिस ने अपहरण कर्ताओ के चक्रव्यूह को तोड़ महज 3 घंटे के अंदर ही उसे अपहरण कर्ताओ के चंगुल से छुड़ा लिया । अपहरण कर्ता  कोई और नही चचेरा भाई और उसका साथी निकला दोनो ही नशे के आदी थे और कर्ज में डूबे हुए थे जिससे उबरने के लिए अपने ही चचेरे मासूम भाई का अपहरण कर 5 लाख फिरौती की माँग की थी ।लेकिन सतना पुलिस ने उनके मंसूबो पर पानी फेर उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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