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वनरक्षक-जेल प्रहरी परीक्षा रद्द होते ही भड़के अभ्यर्थी, 5 किमी पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट पहुंचे

Written by:Bhawna Choubey
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सतना में वनरक्षक, जेल प्रहरी और क्षेत्र रक्षक भर्ती परीक्षा की दूसरी शिफ्ट अचानक रद्द होने से सैकड़ों अभ्यर्थी नाराज हो गए। दूर-दराज के जिलों से परीक्षा देने पहुंचे छात्रों ने कॉलेज से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया और भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों और व्यवस्थागत समस्याओं पर सवाल उठाए।

सतना में आयोजित वनरक्षक, जेल प्रहरी और क्षेत्र रक्षक भर्ती परीक्षा उस समय विवादों में आ गई जब दूसरी शिफ्ट की परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। परीक्षा केंद्र पर मौजूद अभ्यर्थियों को बताया गया कि तकनीकी कारणों और सर्वर संबंधी समस्या के चलते परीक्षा स्थगित कर दी गई है। इस सूचना के बाद छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिली।

महादेवा-शेरगंज स्थित आदित्य इंजीनियरिंग कॉलेज में परीक्षा देने पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थी अचानक हुए इस फैसले से परेशान नजर आए। कई छात्र मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लंबी दूरी तय कर सतना पहुंचे थे। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से उन्हें मानसिक तनाव के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।

दूसरी शिफ्ट की परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों ने पहले परीक्षा केंद्र पर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लगभग 5 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने सरकार और परीक्षा प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी जताई।

भर्ती परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी पर उठे सवाल

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी समस्याएं, सर्वर फेल होने की घटनाएं और परीक्षा स्थगित होने जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का भरोसा प्रभावित हो रहा है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि कई उम्मीदवारों ने यात्रा, रहने और भोजन पर हजारों रुपये खर्च किए। कुछ छात्र एक दिन पहले ही सतना पहुंच गए थे ताकि समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकें। लेकिन परीक्षा रद्द होने से उनकी मेहनत और पैसा दोनों प्रभावित हुए।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में मजबूत तकनीकी व्यवस्था और बैकअप सिस्टम होना जरूरी है। यदि समय पर तकनीकी दिक्कतों को दूर नहीं किया गया तो उम्मीदवारों का विश्वास कमजोर पड़ सकता है।

अभ्यर्थियों की मांगें और प्रशासन का आश्वासन

प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों ने अपनी व्यक्तिगत परेशानियां भी साझा कीं। डिंडोरी जिले के शाहपुरा से आए अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि वह मजदूरी और अन्य काम करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा रद्द होने से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ रोजगार का भी नुकसान उठाना पड़ा।

मामले की जानकारी मिलने के बाद एसडीएम राहुल सिलादिया, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। प्रशासन ने छात्रों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं और मुख्यमंत्री के नाम दिया गया ज्ञापन स्वीकार किया।

अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि छात्रों की मांगों और शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाएगा। वहीं अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी मजबूती सुनिश्चित करने की मांग भी छात्रों ने उठाई है। फिलहाल सभी की नजर अब परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि भर्ती परीक्षाओं में छोटी तकनीकी चूक भी हजारों युवाओं की उम्मीदों और मेहनत को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विभागों के लिए यह घटना एक महत्वपूर्ण सीख मानी जा रही है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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