मध्य प्रदेश के जंगलों में एक बार फिर आग ने तबाही मचा दी। सतना जिले के मझगवां रेंज के रोहनिया गांव के पास अचानक लगी आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते कई हेक्टेयर जंगल इसकी चपेट में आ गया। यह आग सिर्फ पेड़ों को ही नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण और वन्य जीवन को नुकसान पहुंचाती है।
मझगवां रेंज में कैसे फैली जंगल की आग?
मझगवां रेंज के देवलहा बीट के कक्ष क्रमांक पी-839 और पी-840 के जंगल में यह आग अज्ञात कारणों से शुरू हुई। शुरुआत में यह आग सिर्फ झाड़ियों तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे क्षेत्र में फैलती चली गई। सूखी झाड़ियों और लेंटाना जैसी वनस्पतियों ने आग को तेजी से फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई।
तेज हवा ने इस आग को और भयानक बना दिया, जिससे कुछ ही घंटों में 15 से 20 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गया।
10-12 फीट ऊंची लपटें, हालात हुए बेकाबू
इस आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लपटें 10 से 12 फीट तक ऊंची उठ रही थीं। जब आग इस स्तर तक पहुंच जाती है, तो उसे नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता है। आसपास के क्षेत्र में धुआं और गर्मी इतनी ज्यादा थी कि वहां खड़ा रहना भी चुनौती बन गया था। ऐसे हालात में वन विभाग की टीम के लिए आग पर काबू पाना एक बड़ी परीक्षा बन गया।
7 घंटे की जंग के बाद आग पर पाया काबू
वन विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया। करीब 25 सुरक्षा श्रमिकों ने फायर बीटर्स और लीफ ब्लोअर जैसे उपकरणों की मदद से लगातार 7 घंटे तक मेहनत की। यह एक कठिन और जोखिम भरा काम था, लेकिन टीम की मेहनत और समर्पण के कारण आखिरकार रात करीब 8 बजे आग पर काबू पा लिया गया।
दो वनकर्मी बेहोश, अस्पताल में कराया गया इलाज
आग बुझाने के दौरान दो वनकर्मी रामकृष्ण पांडेय और गोविंद यादव बेहोश हो गए। अत्यधिक गर्मी और ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत मझगवां के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। करीब 3 घंटे बाद दोनों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।






