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धारकुंडी आश्रम में परमहंस सच्चिदानंद महाराज को श्रद्धांजलि देने पहुंचे CM मोहन यादव, सोमवार को आश्रम में होगी समाधि

Written by:Banshika Sharma
Published:
सतना स्थित धारकुंडी आश्रम के संस्थापक परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की पार्थिव देह रविवार को आश्रम लाई गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल समेत हजारों अनुयायियों ने उनके अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। सोमवार को आश्रम परिसर में उन्हें विधि-विधान से समाधि दी जाएगी।
धारकुंडी आश्रम में परमहंस सच्चिदानंद महाराज को श्रद्धांजलि देने पहुंचे CM मोहन यादव, सोमवार को आश्रम में होगी समाधि

विंध्य क्षेत्र में शोक की लहर के बीच धारकुंडी आश्रम के संस्थापक परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की पार्थिव देह रविवार को आश्रम पहुंची। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर के बाद अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आश्रम परिसर जयघोष और मंत्रोच्चार से गूंज उठा, जब अनुयायियों ने अपने गुरुदेव के दर्शन किए।

श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए स्वामी जी की पार्थिव देह को गेरुआ वस्त्र पहनाकर गद्दी पर ध्यान मुद्रा में विराजित किया गया था। यह दृश्य देखकर कई भक्तों की आंखें नम हो गईं। पूरे क्षेत्र में गम और श्रद्धा का माहौल है।

मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

परमहंस सच्चिदानंद महाराज को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी धारकुंडी आश्रम पहुंचे। मुख्यमंत्री शाम सवा पांच बजे हेलीकॉप्टर से पहुंचे और स्वामी जी के अंतिम दर्शन कर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।

“मैं अपनी सरकार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। दिव्यात्मा का जाना हम सब के लिए कष्टकारी भी है। मैं बाबा महाकाल से प्रार्थना करता हूं कि अपने धाम में स्थान दें।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

इस अवसर पर राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।

सोमवार को आश्रम परिसर में होगी समाधि

आश्रम प्रबंधन ने जानकारी दी है कि स्वामी जी की समाधि सोमवार को आश्रम परिसर में ही दी जाएगी। बताया जाता है कि परमहंस सच्चिदानंद महाराज ने अपने जीवनकाल में ही समाधि स्थल का चयन कर लिया था। उनकी पार्थिव काया को धारकुंडी आश्रम के गर्भगृह में समाधिस्थ किया जाएगा।

समाधि की वैदिक प्रक्रिया के बारे में मिर्जापुर के शक्तेशगढ़ से आए परमहंस अड़गड़ानंद स्वामी ने प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दी। वे स्वामी सच्चिदानंद जी के गुरु भाई हैं और शनिवार शाम को ही आश्रम पहुंच गए थे। सनातन परंपरा के अनुसार विधि-विधान से पूरा कार्यक्रम संपन्न होगा।

सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम

हजारों की संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। रीवा रेंज से लगभग 500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। संभागीय आयुक्त बीएस जामोद, आईजी गौरव राजपूत, कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आश्रम से करीब पांच किलोमीटर पहले ही पार्किंग स्थल बनाया गया था, जहां से लोगों को आश्रम तक पहुंचाया जा रहा था।

22 वर्ष की उम्र में धारण किया था वैराग्य

परमहंस सच्चिदानंद महाराज ने केवल 22 साल की उम्र में वैराग्य धारण कर लिया था और अपना पूरा जीवन मानव कल्याण व अध्यात्म को समर्पित कर दिया। उन्होंने ‘मानस बोध’ और ‘गीता बोध’ जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। उनके प्रवचनों पर आधारित कई पुस्तकें भी आश्रम द्वारा प्रकाशित की गई हैं।