देवी के मंदिर में रिटायर्ड फौजी ने गोली मार की खुदखुशी, CCTV में कैद

देवी के मंदिर में रिटायर्ड फौजी ने गोली मार की खुदखुशी, CCTV में कैद

सतना|पुष्पराज सिंह बघेल| मध्य प्रदेश के सतना में एक रिटायर फौजी ने आत्मघाती कदम उठाया है।फौजी ने माता के ऐतिहासिक मंदिर भर्जुना देवी के सामने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से खुद की जीवन लीला समाप्त कर ली। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गयी है।

सारी वारदात सी सी टी कैमरे में कैद हो गयी है कि किस तरह रिटायर फौजी तेज भान ने कनपटी में लाइसेंसी पिस्टल रखकर खुदखुशी कर ली| घटना बुधवार की दरमियानी रात की है। घटना की सूचना मिलने पर कोलगवां थान पुलिस मौके पर पहुँच गयी और शव का पंचनामा कर जाँच में जुट गई है।

जिला मुख्यालय से दूर 15 किलोमीटर दूर भर्जुना गाँव के ऐतिहासिक माता के मंदिर में उसवक्त सनसनी फैल गयी जब सुबह लोग भर्जुना माता के मंदिर में पूजा के लिए पहुँचे लेकिन मंदिर के प्रवेश द्वार के अंदर ही खून से लथपथ गाँव के रिटायर फौजी तेज भान का शव पड़ा मिला शव के पास ही फौजी की लाइसेंसी पिस्टल पड़ी थी प्रथम दृष्टया मामल हत्या का मालूम पड़ रहा था लेकिन सी सी टी कैमरे ने सच्चाई साफ बयाँ कर दी कैमरे में रिटायर फौजी ने मंदिर परिसर के अंदर अपनी ही लाइसेंसी पिस्टर से अपनी लीला समाप्त कर ली।इस घटना को लेकर गाँव मे तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है कोई इसे खुद की बली देना बता रहे है तो कोई नशे की हालत में दुःसाहस भरा कदम। बहरहाल इस घटना के बाद से कोलगवां पुलिस ने शव का पंचनामा कर जांच शुरू कर दी है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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