सतना में नवजात की मौत पर बवाल, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाया लापरवाही का आरोप

सतना में प्रसव के बाद हुई नवजात की मौत के बाद अस्पताल में जमकर हंगामा देखने को मिला। परिजनों ने प्रबंधन पर लापरवाही करने के आरोप लगाए है। देर रात तक यहां हंगामे की स्थिति देखने को मिली।
Satna

सतना के एक हॉस्पिटल में प्रसव के बाद एक नवजात की मौत होने की जानकारी सामने आई है। नवजात की मौत के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति देखने को मिली। परिजनों ने नर्सिंग होम प्रबंधन कर लापरवाही का आरोप लगाया है।

ये पूरा मामला शहर के दीपमाला हॉस्पिटल में देखने को मिला। परिजनों का कहना है कि प्रसव के बाद बच्चा ठीक था। लेकिन जब अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं था। जब वो बच्चे को दूसरे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। तब तक बच्चे की मौत हो गई थी। जांच करने पर डॉक्टरों ने उसे मृत बताया।

प्रसव के बाद नवजात की मौत

दीपमाला हॉस्पिटल के इस मामले से जुड़ी जो जानकारी सामने आई है। उसके मुताबिक पतेरी की रहने वाली शालिनी सिंह परिहार को 14 अक्टूबर को सुबह 5 बजे परिजनों ने अस्पताल में भर्ती करवाया था। सुबह 11 बजे के लगभग ऑपरेशन से बच्चे का जन्म हुआ था। जच्चा और बच्चा दोनों ही प्रसव के बाद स्वस्थ्य थे।

अचानक बिगड़ी बच्चे की तबीयत

परिजनों का कहना है कि जन्म के बाद नवजात की हालत बिल्कुल सामान्य थी। लेकिन शाम 4 बजे तक उसे सांस लेने में दिक्कत आने लगी। बच्चे और उसकी मां का इलाज डॉ सुशील द्वारा किया जा रहा था। लेकिन डॉक्टर के रीवा में होने की वजह से परिजन बच्चे को डॉ राकेश जैन के पास लेकर गए। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत बता दिया।

अस्पताल में हुआ हंगामा

जब परिजनों को नवजात की मौत की खबर लगी तो अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया। परिजन ये जानना चाहते थे कि बच्चा यदि स्वस्थ्य था तो फिर उसकी मौत का कारण क्या था। ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि नर्सिंग होम में शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद क्यों नहीं थे। हंगामे की सूचना लगने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। लेकिन परिजनों ने कोलगवां थाने में शिकायत दर्ज नहीं करवाई।

इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच देर रात तक बहसबाजी चलती रही। परिजनों का कहना था कि वो बार बार हॉस्पिटल प्रबंधन से बच्चे को देखने को बोल रहे थे। लेकिन उन्हें किसी भी तरह का रिस्पांस नहीं दिया गया। जब बच्चा गंभीर होने लगा तब बोला गया कि उसे दूसरी जगह ले जाओ। दूसरी जगह ले जाने पर उसकी मौत होने की जानकारी मिली। अगर पहले रिस्पॉन्स दे दिया जाता तो समय पर इलाज मिलने से शायद नवजात की जान बचाई जा सकती थी। इस ओर मामले में अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर की तरफ से किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी गई है।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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