अवैध उत्खनन पर लगातार कार्रवाई से माफियाओं में हड़कंप

अवैध उत्खनन पर लगातार कार्रवाई से माफियाओं में हड़कंप

सीहोर।अनुराग शर्मा।
नर्मदा नदी से किए जा रहे अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने पहली बार राजस्व और पुलिस के 200 अधिकारियों व कर्मचारियों को जब दो शिफ्ट में तैनात किया गया तो 2 दिन में ही बुधनी रेहटी और नसरुल्लागंज में 50 से अधिक रेत से भरे डंपर और पांच ट्रैक्टर ट्राली जप्त की गई। दिन रात चल रही कार्रवाई से ऐसा हड़कंप मचा किया अवैध कारोबारी निष्क्रिय नजर आ रहे हैं ।

पहली बार सभी राजस्व और पुलिस अधिकारियों को रेत खदानों के हिसाब से तैनात किया गया। इसके लिए दो शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई सुबह 10:00 बजे से रात 10:00 बजे तक। पहली शिफ्ट और फिर रात 10:00 बजे से सुबह 10:00 बजे तक दूसरी शिफ्ट बनाई गई ।इन शिफ्ट में अधिकारियों के साथ संबंधित थानों का अमला भी दिया गया ।इस मुहिम के कारण अब बुधनी और आसपास के क्षेत्रों की रेत खदानों को सन्नाटा पसरा गया है ।सड़क से भी रेत बहान बहुत कम निकल रहे हैं ।जो निकल रहे हैं वह भी रॉयल्टी लेकर रेत ले जा रहे हैं इनमें ओवरलोड रेत भी नहीं भरी हुई है।

बुधनी एसडीएम वरुण अवस्थी ने बताया कि रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन रोक में जो मुहिम चलाई जा रही है। उसमें 50 अधिक रेत के ओवरलोड वाहन जप्त किए गए अब लगातार इस तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। कंप्यूटर बाबा नसरुल्लागंज क्षेत्र में नर्मदा किनारे पहुंचे नदी न्यास बोर्ड के अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा को नसरुल्लागंज क्षेत्र में नर्मदा कराने पहुंचे ।उन्होंने यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में पूरी नर्मदा से कोई एकता वाली रेट भी आगे तरीके से नहीं निकाल पाएगा ।उन्होंने प्रदेश की कमलनाथ सरकार और अधिकारियों का भी पक्ष लिया। हालांकि कंप्यूटर बाबा के साथ जिले के स्तरीय कोई भी अधिकारी नजर नहीं आए जो चर्चा का विषय बना रहा। यह तक की खनिज विभाग के अधिकारी भी नहीं थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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