गर्भवती पत्नी को घर पर छोड़ 24 घंटे काम कर रहे डॉक्टर, 9 दिन से नहीं गए घर

गर्भवती पत्नी को घर पर छोड़ 24 घंटे काम कर रहे डॉक्टर, 9 दिन से नहीं गए घर

सीहोर/अनुराग शर्मा

इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में है और कोरोना वायरस के खतरे के बीच सीमित संसाधनों में डॉक्टर दिन रात की ड्यूटी कर रहे हैं। ये कई कई दिनों तक अपने घर तक नही जा पा रहे हैं। इनमें से कई डाक्टरों के घरों की स्थिति भी ऐसी है कि वहां उनकी सख्त जरूरत है लेकिन वो इस समय परिवार को छोड़ समाज के प्रति अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ऐसे ही हैं सीहोर के कोरोना नोडल अधिकारी डॉक्टर अमित राजवानी, ये ड्यूटी के कारण पिछले 9 दिन से घर नहीं जा पाएं हैं और इनके घर में इतनी गर्भवती पत्नी अकेली हैं। डॉक्टर राजवानी जिला अस्पताल में 24 घण्टे सेवाएं देकर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। इनकी शादी पिछले साल ही हुई हैऔर उनकी पत्नी दो माह से गर्भवती हैं। सीहोर में रहते  हुए भी वह अपने घर नहीं जा रहे हैं। इसी दौरान चर्चा के बीच उन्होंने बताया कि पत्नी गर्भवती है और शहर में लॉक डाउन है। उन्हें पत्नी की चिंता रहती है, लेकिन ड्यूटी पहले आती है। उनका कहना है कि खुशी इस बात की है कि वह देश की सेवा कर रहे हैं और सीहोर जिले में अभी तक एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज नहीं मिला है। पत्नी से उनकी फोन पर बात हो जाती है और दोनों एक दूसरे के हाल चाल पूछ लेते हैं। पत्नी उन्हें खयाल रखने को कहती है और ऐसे कठिन समय में उनका मनोबल बनाए रखती हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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