नन्हें-कदम बढ़ते-कदम कार्यक्रम का रंगारंग आयोजन, बच्चों ने की जमकर मस्ती

नन्हें-कदम बढ़ते-कदम कार्यक्रम का रंगारंग आयोजन, बच्चों ने की जमकर मस्ती

अनुराग शर्मा/सीहोर: ब्ल्यू बर्ड स्कूल में 20वां नन्हें कदम बढ़ते कदम कार्यक्रम का धूमधाम से आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत क्लास केजी 2 की शिक्षिकाओं ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। वहीं कार्यक्रम का संचालन स्कूल के प्राचार्य जयंत दासवानी ने किया और साथ ही प्रत्येक छात्र को गिफ्ट देकर प्रोत्साहित भी किया कार्यक्रम में नन्हे नन्हें बच्चों ने अपनी रंगा रंग प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। कार्यक्रम में बच्चों ने एकल नृत्य और फैंसी ड्रेस में प्रतियोगिता में भी भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बच्चों के माता-पिता, दादा-दादी मौजूद रहे। यह कार्यक्रम केजी 2 के बच्चों के लिए रखा गया था, जिसमे क्लास के 135 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में कई बच्चों ने डांस तो कई ने फैंसी ड्रेस में भाग लिया। बच्चों ने समाज सुधार से संबन्धित कई किरदारों में आकर रक्त दान, बाल मजदूरी, स्वच्छता, बेटी बचाओ, किताब, श्रवण कुमार, एकलव्य, डेटॉल, स्वामी विवेकानंद जेसे प्रेरणादायक भूमिका में आकर समाज कल्याण के लिए लोगों को प्रेरित किया। नृत्य में भाग लेने वाले सभी बच्चों ने प्रेरणादायक गानों पर डांस किया वहीं केजी 1 और नर्सरी क्लास का प्रोग्राम 9 और 16 फरवरी को आयोजित किया जाएगा। और अंत में स्कूल के चेयरमेन बसंत दासवानी ने सभी का आभार जाताया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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