सीहोर जिले के चैनपुरा बड़ली से टीलाखेड़ी वेयरहाउस तक जाने वाला करीब 3 किलोमीटर लंबा रास्ता पिछले कई सालों से बदहाली का आंसू बहा रहा है। हर बार बारिश के मौसम में यह सड़क पूरी तरह कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो जाती है। हालत इतनी खराब हो चुकी है कि मुख्य रास्ते से गुजरना तो दूर, ग्रामीणों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए खेतों की मेड़ और पगडंडियों का सहारा लेना पड़ रहा है।

दरअसल, यह पूरा मार्ग सीहोर और भोपाल, दोनों जिलों की सीमाओं के बिल्कुल मुहाने पर आता है। यही वजह है कि अंतर-जिला सीमा के पचड़े में फंसकर इस सड़क का निर्माण कार्य सालों से अधर में लटका हुआ है। स्थानीय निवासियों का दर्द है कि इस रास्ते की बदहाली देखते-देखते कई पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन जिम्मेदार प्रशासनिक अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने आज तक इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा।

फंदा इलाके को जोड़ता है रास्ता

यह कच्चा और गड्ढों भरा रास्ता आसपास के कई ग्रामीण इलाकों को सीधे भोपाल के फंदा क्षेत्र से जोड़ता है। रोजाना दर्जनों गांवों के लोग इसी रास्ते से होकर काम के सिलसिले में गुजरते हैं, लेकिन कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है और वे गिरकर चोटिल हो रहे हैं। इसके अलावा, रात के वक्त सड़क पर स्ट्रीट लाइट न होने से अंधेरा पसरा रहता है, जिससे हादसों का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

ग्रामीणों ने लगाई गुहार

परेशान ग्रामीणों ने अब एकजुट होकर सीहोर और भोपाल दोनों जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की है और जल्द से जल्द पक्की सड़क बनाने की गुहार लगाई है। वहीं दूसरी तरफ ग्राम पंचायत का कहना है कि वे अपने स्तर पर समय-समय पर रास्ते की मरम्मत का काम कराते रहते हैं। हालांकि ग्रामीणों का मानना है कि जब तक दोनों जिला प्रशासन आपस में समन्वय बनाकर पक्की सड़क को मंजूरी नहीं देते, तब तक स्थाई हल नहीं निकलेगा।