मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में इस बार विजयादशमी का त्योहार एक अलग ही रूप में देखने को मिल रहा है। बिजली विभाग के अफसरों की ढिलाई और अनदेखी से तंग आकर किसानों ने एक अनोखा विरोध दर्ज कराने का मन बनाया है। गाँव के किसान इस बार रावण के पारंपरिक पुतले की जगह बिजली कंपनी के अधिकारियों के अहंकार और लापरवाही के प्रतीक पुतले को आग के हवाले करेंगे।
झूलते बिजली के तारों से परेशान किसानों ने खोला मोर्चा
सीहोर जिले के कई गांवों में खेतों के ऊपर से गुजर रहे 11 केवी के बिजली के तार काफी नीचे तक झूल रहे हैं। इन खतरनाक तारों की वजह से खेतों में काम करने वाले कई किसान हादसे का शिकार हो चुके हैं। कई लोगों को गंभीर करंट लग चुका है और कुछ लोगों की तो जान तक चली गई है, लेकिन शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
किसान पिछले चार महीनों से सीहोर से लेकर भोपाल तक धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। किसानों की मांग है कि करंट से जान गंवाने वाली सुगंध बाई के बेटे और गंभीर रूप से घायल सतीश मेवाड़ा को 25 लाख का मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। पीड़ित परिवारों को जब तक मदद नहीं मिलती, तब तक किसानों का गुस्सा शांत नहीं होने वाला।
लापरवाह अफसरों पर दर्ज हो एफआईआर
किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनकी मांग है कि खेतों में मौत बनकर लटक रहे हाई-टेंशन तारों को तुरंत ठीक किया जाए। इसके साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधीक्षण यंत्री (SE), कार्यपालन यंत्री (EE) और सहायक यंत्री (AEE) के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाए, ताकि आगे से कोई भी अधिकारी किसानों की सुरक्षा से खिलवाड़ न कर सके
न्याय मिलने तक जारी रहेगा किसानों का आंदोलन
किसान नेता एमएस मेवाड़ा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह पुतला दहन सिर्फ एक दिन का विरोध प्रदर्शन नहीं है। यह शासन-प्रशासन की नींद खोलने का एक तरीका है। अगर सरकार और प्रशासन ने जल्द ही पीड़ित किसान परिवारों को सही न्याय नहीं दिया और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो किसान अपना आंदोलन और ज्यादा तेज करेंगे।






