कोरोना वायरस के खतरे के प्रति जागरूकता फैलाते- बच्चे

कोरोना वायरस के खतरे के प्रति जागरूकता फैलाते- बच्चे

सीहोर। अनुराग शर्मा. एक ओर जहां कोरोना वायरस का खतरा पूरे विश्व मे बढ़ता जा रहा है। दिन प्रति दिन कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। देश मे भी अब कोरोना वायरस अपना असर दिखाने लगा है देश के प्रधनमंत्री सहित तमाम सरकारी संस्थाए इस वायरस के प्रति जनता को जागरूक कर रही है।

ऐसे में कोरोना वायरस के प्रति जागरुक करने का बीड़ा शहर के कुछ बच्चों ने अपने ऊपर लिया है ये बच्चे सुबह से ही टोली बनाकर हाथ मे कोरोना वायरस से बचाव के तरीके बताता पम्पलेट लेकर नगर में निकल पड़ता है और दुकानो पर इस पम्पलेट को चस्पा कर दुकानदार को भी समझता है कि आप भी अपनी दुकान में आने वाले ग्राहकों को इस वायरस के प्रति जागरूक करे।

इन बच्चो ने अपनी पॉकेट मनी से पैसे बचाकर एकत्रित किये रुपयों से पम्पलेट छपवाए है। बच्चो की इस टोली में अधिकतर बच्चे 15 से 20 वर्ष के है। बच्चो के इस कार्य की नगर वासियो ओर दुकानदारो द्वारा प्रशंशा की जा रही है वही कोतवाली टी आई मनोज मिश्रा ने भी बच्चो के इस कार्य की प्रसंशा की।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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