शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “मैं चाहता तो पहले ही बन जाता CM”

शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “मैं चाहता तो पहले ही बन जाता CM”

सीहोर। अनुराग शर्मा।

सियासी घमासान के बीच बुधवार को सीहोर में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें शिवराज ने कहा कि अगर मैं चाहता तो उसी समय (15 महीने पहले) मुख्यमंत्री बन जाता। लोग (विधायक) भी आ रहे थे पर हमने ही कहा, आपकी अधिक सीटें आई हैं आप सरकार बनाओ। बागी विधायक वीडियो जारी कर रहे है कोई भी बंधक नही है।अब दिग्विजय सिंह मांन न मान में तेरा मेहमान वाला व्यवहार कर रहे है।

शिवराज ने कहा कि हम सर्वोच्य न्यालालय का सम्मान करते है। जो फैसला विधानसभा में होना है वो विधानसभा में होगा और जो फैसला न्यालालय में होना है वो न्यालालय में होगा पर हम सड़को पर भी जवाब देना जानती है। लेकिन हम न्यालालय का सम्मान करते है सत्य की विजय होगी जो लोग पुतले जला रहे है वो बोखला रहे है

भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि हुड़दंग गैंग ने बेंगलुरु में जाकर हुड़दंग करने का प्रयास कि या है। जैसा कि पहले उनके मंत्री कर चुके हैं। मप्र में जिस तरह से आंदोलन करने का प्रयास कि या। भाजपा के कार्यकर्ता लड़ाई लड़ना ही नहीं जानते, उनको जवाब देना भी जानते हैं। लेकि न हम सुप्रीम कोर्ट पर विश्वास रखते हैं। पूरे घटना की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है और कल भी चलेगी। कोर्ट का जो भी आदेश होगा। उसका पालन करने का प्रयास भाजपा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी कह रहे है कि हम कोरोना वायरस के कारण विस की कार्रवाई में शामिल नहीं हो रहे हैं। लेकि न आंदोलन के लिए सड़कों पर जमा हो रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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