मृत व्यक्ति 6 साल तक कागज़ों में रहा जीवित, वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ गोरखधंधा

मृत व्यक्ति 6 साल तक कागज़ों में रहा जीवित, वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ गोरखधंधा

अनुराग शर्मा/सीहोर। यूं तो वन विभाग अपने कारनामों के कारण समय समय पर चर्चा का विषय बना रहता है लेकिन इस बार के कारनामे के आगे बाबू से लेकर अधिकारियों तक की बोलती बंद हो गई है। दरअसल सीहोर जिले की आष्टा तहसील के निवासी अब्दुल राशिद विभाग में आरा मशीन का काम करते थे। उनकी मृत्यु 2014 में हो गई थी और उनका मृत्यु प्रमाण पत्र घरवालों द्वारा वन विभाग में जमा भी करा दिया गया था। लेकिन ताज्जुब की बात ये है  कि अब्दुल राशिद के नाम से साल 2014 से 2019 तक अपनी आरा मशीन का नवीनीकरण कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, उनके नवीनीकरण के दास्तावेजो पर हस्ताक्षर भी हो रहे हैं। इसके अलावा वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा वार्षिक निरीक्षण पर भी उपस्थित होकर आरा मशीन में आने और जाने वाली जलाऊ लकड़ी का हिसाब भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

अब सवाल ये उठता है कि जब नगर पालिका के दास्तावेजो के अनुसार अब्दुल रशीद की मृत्यु 2014 में हो गई थी तो फिर कैसे वन विभाग के दास्तावेजो में अब्दुल रशीद आकर अपने हस्ताक्षर कर रहे हैं। इस बारे में बताया जा  रहा है कि अब्दुल के परिजनों के बीच उत्ताधकरियों की लड़ाई होने की वजह से उसके वारिसों ने वन कर्मचारियों की मिलीभगत से अब्दुल रशीद को कागजो में जिंदा रखा और बाकायदा दास्तावेजों में अब्दुल रशीद के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर 2019 तक आरा मशीन का नवीनीकरण कराया गया। इसके पीछे जो कहानी निकलकर समाने आई है उसके अनुसार वो सरकारी नियम है जिसके अंतर्गत 1996 के बाद से मध्यप्रदेश में जितनी संख्या में आरा मशीन अस्तित्व में है अब उतनी ही रहेगी, उनका स्थान और मालिकाना हक बदल सकता है पर संख्या में कोई परिवर्तन नही होगा। बस यही नियम इस मामले में आड़े आ गया. चूंकि मालिकाना हक की लड़ाई उत्तराधिकारियों में चल रही थी ऐसी स्थिति में आरा मशीन बचाने के लिए वन कर्मियों के साथ मिलिभगत कर मृत व्यक्ति को कागजो पर जिंदा रखा गया। मामला सामने आने के बाद अब अधिकारी जांच की बात कर रहे हैं।

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