लॉकडाउन के बीच किसानों पर मौसम की मार, फसलें बर्बाद

लॉकडाउन के बीच किसानों पर मौसम की मार, फसलें बर्बाद

सीहोर//अनुराग शर्मा।

प्रदेश में महामारी के बीच बेमौसम बरसात ने किसानों का हाल बेहाल कर रखा है। सीहोर में विगत 2 दिनों से हुई बारिश ने किसानों के लिए कहर का काम किया है। कई इलाकों में बारिश के साथ ओले भी गिरे हैं। जिससे किसानों की इस वर्ष अच्छी पैदावार होती दिख रही फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।

गेहूं की पक्की हुई खड़ी फसल वह कटी हुई फसल के भीगने से दाना फूलने की आशंका बनी है एवं कई जगह खड़ी फसल आड़ी हो गई है। जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इस नुकसान की वजह से किसानों की नजरें एक बार फिर सरकार की ओर है। किसानों ने बताया असमय बारिश से हमारी फसलों को भारी नुकसान हुआ है फिलहाल जो निकल गई है वह फसल भी लॉकडाउन की वजह से बेच नहीं पा रहा है ।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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