बैंगलुरु घटनाक्रम पर क्या बोले शिवराज, देखें वीडियो

बैंगलुरु घटनाक्रम पर क्या बोले शिवराज, देखें वीडियो

सीहोर। अनुराग शर्मा। एमपी में जारी सत्ता संग्राम के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बैंगलुरु जाने के बाद सियासत गर्मा गई है। कमलनाथ सरकार और बीजेपी के बीच जुबानी जंग शुरु हो गई है।जहां मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधायकों को लाने के लिए खुद बैंगलुरु जाने की बात कही है वही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिग्विजय को बड़ा ड्रामेबाज बताया है।

आज बुधवार को सीहोर के ग्रेसिस रिसोर्ट में मीडिया से चर्चा करते हुए शिवराज ने कहा कि अब कमल नाथ जी को भी अपने विधायकों की याद आ रही है। सवा साल से आप क्या कर रहे थे। अरे दुःख में सुमिरन सब करें सुख में करे न कोए, जो सुख में सुमिरन करे तो दुख कहे को होए। तब उनकी सुनी नहीं।

शिवराज ने कहा कि दिग्विजयसिंह बहुत बड़े ड्रामेबाज हैं। कांग्रेस के विधायक इतने त्रस्त थे इनसे की वो वीडियो जारी करके बोल रहे हैं कि हमें नहीं मिलना। मिलने से इंकार कर रहे हैं। फिर भी उनसे मिलने पहुंच गए।  जनता को त्रस्त और परेशान कर दिया। मप्र को भ्रष्टाचार का गढ़ बना दिया। प्रदेश को तबाह और बर्बाद कर दिया। और अब हड़बड़ी में बात नहीं कर रहे मुख्यमंत्री।

जाते जाते भी प्रदेश को बर्बाद करने में लगे हुए है। जब कोई फौज हारकर पीछे लौटती है, तो जाते जाते कितना तबाह और बर्बाद कर देती है। वो आज मुख्यमंत्री कर रहे हैं।  आयोग के अध्यक्ष बना दो, कल तक कोई फैसला नहीं किया था। बड़े बड़े फैसले कर दो।जनता त्रस्त और परेशान है। यह हमने गवर्नर साहब से बोला है। हड़बड़ी में संवेधनी पदों पर नियुक्ति हो रही है। और इसलिए इस तरह से बरगलाने वाले मामले इन्हें बचा नहीं सकते। तबाही की कगार पर इस प्रदेश को पहुंचा दिया है इन्होंने। और अब उनके ही विधायक कह रहे है कि इस सरकार और इनके साथ नहीं है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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