अच्छी बारिश के लिए सुबह बनाई दाल-बाटी और शाम को एक साथ महिलाओं ने की इंद्र की पूजा

अच्छी बारिश के लिए सुबह बनाई दाल-बाटी और शाम को एक साथ महिलाओं ने की इंद्र की पूजा

सीहोर। अनुराग शर्मा| हर साल की तरह इस साल भी ग्राम झरखेड़ा में अच्छी बारिश की कामना को लेकर सुबह गांव के बाहर खेतों में पहले तो दाल-बाटी बनाई और उसके बाद सामूहिक रूप से महिलाओं ने भगवान इंद्र की पूजा अर्चना की।

इस संबंध में सरपंच प्रतिनिधि सुरेश विश्वकर्मा ने बताया कि तपती दोपहरी, चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं से मानव जीवन इन दिनों अस्त-व्यस्त हो गया है। पिछले कई दिनों से बारिश थमने से खेतों में सोयाबीन सहित अन्य फसलों पर खतरा मंडराने लगा है। कुछ दिन पानी बंद रहा तो फसल तबाह हो सकती है। वही सचिव मुकेश पाटीदार ने बताया कि पानी न बरसने से परेशान किसानों के परिवार ने इंद्र देवता को मनाने के लिए खेतों में सामूहिक रूप से दाल-बाटी बनाई। ग्रामीणों की आस्था और श्रद्धा है कि इस तरह के आयोजन से इंद्र प्रसन्न होते हैं और जोरदार बारिश कराते है। इस मौके पर कैलाश चंद्र पटेल, रामबाबू पाटीदार और नंदू पाटीदार आदि शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग आदि का पालन भी किया गया। इन दिनों कोरोना संक्रमण के कारण बड़े स्तर पर आयोजन का निरस्त किया गया है। इधर कैलाश चंद्र पटेल का कहना है कि विगत कई सालों से अतिवृष्टि और अल्प बारिश आदि की समस्या में ग्रामीणों द्वारा धार्मिक आयोजन किया जाता है। इस वर्ष बहुत ही कम बारिश हुई है, इसको देखते हुए सामूहिक रूप से आयोजन किया गया है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews