जल्दी ही होगा ई-पत्रिका हिंदी की कविता का शुभारंभ: डॉ. प्रियंका त्रिपाठी

जल्दी ही होगा ई-पत्रिका हिंदी की कविता का शुभारंभ: डॉ. प्रियंका त्रिपाठी

शहडोल।
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की वरिष्ठ साहित्यकारा डॉ. प्रियंका त्रिपाठी की हिन्दी की कविताओं का अब ई-पत्रिका में शुभारंभ होने जा रहा है।लॉक डाउन में उनकी कविताओं को अब ई-पत्रिका के माध्यम से भी पढ़ सकते है।यह नई पहल है जो पाठकों के लिए काफी सही साबित होगी।

इस पर ज्यादा जानकारी देते हुए डॉ. प्रियंका त्रिपाठी ने बताया कि जन सामान्य तक आसानी से कविताओं का प्रचार-प्रसार हो सके इसके लिए शीघ्र ही वेबसाइट के माध्यम से हिंदी की कविता नाम से ई-पत्रिका का शुभारंभ किया जा रहा है। इस की अवधारणा डॉ.अशोक कुमार पटेल “प्रियम” जो एक उम्दा कहानीकार एवं साहित्यकार हैं उन्होंने रखी है… पत्रिका को त्रैमासिक ऑनलाइन प्रकाशित किया जाएगा ।इसके पश्चात किसी ख्याति लब्ध प्रकाशक से चार अंको को समाहित करते हुए वार्षिक काव्य संग्रह भी निकाला जाएगा ।

त्रिपाठी ने बताया कि इसकी अवधारणा यह सोच कर रखी गई थी हिंदी कविता की नई विधाओं को एक नया मंच मिल सके साथ ही नए कवि उभरकर जनसामान्य तक पहुँच सके उनको एक मंच मिले जहाँ पर वो अपनी लेखनी की क्षमता को सिद्ध कर सकें। साथ ही रचनाओं की भावनाओं को व्यक्त करते हुए रेखा चित्र या चित्र इस पत्रिका के मुख्य आकर्षण के बिंदु होंगे ।

वही डॉ.अशोक ने बताया कि वेबसाइट निर्माण की समस्त प्रक्रियाएँ पूर्ण कर ली गई हैं । इस ई-पत्रिका की संपादिक डॉ.प्रियंका त्रिपाठी होंगी जिनके संपादन में रचनाकारों से रचनाएँ आमंत्रित की जा रही हैं शीघ्र ही इसका त्रैमासिक अंक ऑनलाइन प्रकाशित किया जाएगा ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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