मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के एक नन्हे शावक की मौत हो गई है। सोमवार वन विभाग की टीम को निगरानी के दौरान यह शावक मृत हालत में मिला।
चार शावकों के साथ दिखी आशा
दरअसल कल सुबह जब वन विभाग की ट्रैकिंग टीम कूनो में चीतों की रूटीन निगरानी कर रही थी तब मादा चीता आशा अपने पांच में से सिर्फ चार शावकों के साथ ही नजर आई। एक शावक को गायब देखकर टीम के कान खड़े हो गए और तुरंत कूनो के जंगल में उसकी तलाश शुरू की गई। थोड़ी देर छानबीन करने के बाद गुम हुआ शावक झाड़ियों के पास मृत अवस्था में मिला।
कूनो में बचे 53 चीते
इस एक शावक की मौत के बाद अब अकेले कूनो नेशनल पार्क में चीतों की गिनती घटकर 53 रह गई है जिनमें से 40 भारत में जन्मे चीते हैं। चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि शावक की मौत असल में किस वजह से हुई है यह बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगी।
देश के अलग-अलग जंगलों में मौजूद हैं चीते
अगर पूरे देश में चीतों की मौजूदगी की बात करें तो कूनो के खुले जंगल में इस समय 15 चीते घूम रहे हैं। इसके अलावा मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में चार चीते मौजूद हैं, जबकि दमोह के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को रखा गया है। बाकी चीतों को कूनो के बड़े बाड़ों में सुरक्षा के बीच रखा गया है।
चीता प्रोजेक्ट के लिए बड़ा झटका
कूनो में लगातार चीतों के कुनबे को बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं, ऐसे में आठ महीने के शावक को खोना प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। घटना के बाद से वन विभाग ने कूनो के बाकी सभी चीतों और उनके बच्चों की सुरक्षा और निगरानी को और ज्यादा सख्त कर दिया है।






