किसान की बेटी ने रचा इतिहास! MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में अर्चना पांचाल बनीं स्टेट टॉपर

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर (हिंदी) परीक्षा में शिवपुर गांव की अर्चना पांचाल ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर मिसाल कायम की है। किसान परिवार से आने वाली अर्चना ने दूसरे प्रयास में यह सफलता पाई।
किसान की बेटी ने रचा इतिहास! MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में अर्चना पांचाल बनीं स्टेट टॉपर

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के नतीजों में शिवपुर गांव की अर्चना पांचाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। शनिवार को घोषित परिणाम में करीब 6 हजार अभ्यर्थियों के बीच अर्चना ने टॉप रैंक हासिल की। इस परीक्षा में कुल 85 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। अर्चना की सफलता से उनके गांव, जिले और परिवार में खुशी का माहौल है।

अर्चना की यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने पहले प्रयास में असफल होने के बाद हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और इस बार न सिर्फ चयन हासिल किया, बल्कि प्रदेश में पहली रैंक भी अपने नाम कर ली। उनकी सफलता उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो एक बार असफल होने के बाद अपने सपनों को छोड़ देते हैं।

 दूसरे प्रयास में बनीं टॉपर

अर्चना पांचाल ने बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने पहली बार एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा दी थी। उस समय वह इंटरव्यू तक पहुंच गई थीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ दोबारा तैयारी शुरू की। लगातार पढ़ाई, सही रणनीति और धैर्य के दम पर उन्होंने इस बार प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर लिया।

अर्चना वर्तमान में इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में हिंदी विषय में पीएचडी कर रही हैं। इससे पहले उन्होंने रतलाम के शासकीय कन्या महाविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। 1 जून 2025 को आयोजित हुई इस परीक्षा का परिणाम अब उनके वर्षों की मेहनत का सबसे बड़ा पुरस्कार बनकर सामने आया है। उनकी सफलता यह दिखाती है कि सही दिशा में लगातार प्रयास करने से बड़ी मंजिल भी हासिल की जा सकती है।

किसान परिवार की बेटी

अर्चना पांचाल का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। जब वह सिर्फ 11 साल की थीं, तभी उनकी मां विष्णुबाई का निधन हो गया था। इसके बाद उनके पिता रमेशचंद्र ने खेती करते हुए पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली और बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। बड़े भाई सुनील पिता के साथ खेती का काम करते हैं, जबकि छोटे भाई अनिल मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाते हैं।

परिवार के सीमित संसाधनों के बावजूद अर्चना ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटीं। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता, दोनों भाइयों, शिक्षकों और परिवार के सहयोग को दिया है। गांव के लोगों का कहना है कि अर्चना की उपलब्धि पूरे क्षेत्र के छात्रों के लिए प्रेरणा बनेगी। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादे, मेहनत और परिवार का साथ हो तो कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। अब उनकी इस उपलब्धि पर पूरे जिले में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई देने उनके घर पहुंच रहे हैं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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