तबियत बिगड़ते ही ट्रक ड्राइवर ने मजदूर को रास्ते में छोड़ा, इलाज के दौरान मौत

तबियत बिगड़ते ही ट्रक ड्राइवर ने मजदूर को रास्ते में छोड़ा, इलाज के दौरान मौत

शिवपुरी। गुजरात (Gujrat) के सूरत (Surat) से उत्तर प्रदेश (Uttarpradesh) के बस्ती जिला जाने के लिए ट्रक से लौट रहे कोरोना संदिग्ध मजदूर की अचानक तबियत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई| शनिवार शाम बेहोशी की हालत में लाए गए मजदूर युवक ने देर रात दम तोड़ दिया। उसे वेंटीलेटर पर रखा गया था।

जानकारी के मुताबिक यूपी के बंदी बलास जिला बस्ती निवासी मजदूर युवक अमृत 24 पुत्र रामचरण को शुक्रवार शाम बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। ट्रक से लौट रहे मजदूर युवक की हालत अचानक बिगड़ गई थी। ट्रक में बैठीं दूसरी सवारियों ने विरोध कर युवक को सड़क किनारे उतरवा दिया। हाईवे से गुजर रहे लोगों ने एम्बुलेंस बुलाई और अस्पताल भेजा| सीएमएचओ डॉक्टर एएल शर्मा ने बताया कि युवक का सैंपल ले लिया गया है, लेकिन अभी रिपोर्ट नहीं आई।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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