कलेक्टर के निर्देश,बाहर निकलें तो करें सोशल डिस्टेंस का पालन,गाइ़डलाइन फॉलो करें

कलेक्टर के निर्देश,बाहर निकलें तो करें सोशल डिस्टेंस का पालन,गाइ़डलाइन फॉलो करें

सिंगरौली/राघवेंद्र सिंह गहरवार

कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने जिले के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों से कहा है कि वह अपने प्रतिष्ठान में सामाजिक दूरी के नियमों का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। प्रतिष्ठानों मे आने वाले ग्राहकों के हाथों को सेनेटाईज कराने के बाद ही अपने प्रतिष्ठान मे प्रवेश कराये। उन्होने निर्देश दिये कि दुकानदार व ग्राहक मास्क लगाकार ही वस्तुओं का लेने देने करें।

कलेक्टर ने कहा है कि जिले में कोरोना वायरस से बचाव के लिये यह आवश्यक है कि शासन के दिशा निर्देशों का शत प्रतिशत पालन किया जाय। अभी कोरोना वायरस का संक्रमण कम नहीं हुआ है। जिले में व्यापारिक गतिविधियों के संचालन के लिये छूट दी गयी है जिसके तहत समय सीमा भी नियत है, उसी अनुसार व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों-दुकानों का संचालन करें। कलेक्टर द्वारा निर्देश दिया गया है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वालों के विरूद्ध चलानी कार्यवाही की जायेगी।

कलेक्टर ने जिले के आम नागरिकों से अपील करते हुये कहा कि कोरोना महामारी अभी खत्म नही हुई है, सभी लोगो को शासन द्वारा जारी गाइड लाइन का शत प्रतिशत पालन करना जरूरी है। उन्होने कहा कि आवश्यक होने ही पर घर से बाहर मास्क लगाकर निकलें, अपने घर के बुजुर्ग एवं बच्चो की उचित देखभाल करें। करोना से डरने की जरूरत नहीं है कोराने को हराने के लिए सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करें। साथ ही समय समय पर शासन द्वारा जारी की गई गाइड लाइन का भी पालन करें।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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