सिंगरौली जिले में लंबे समय से अवैध रेत खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आ रही थीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद जिला प्रशासन ने राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम के साथ बड़े स्तर पर जांच अभियान शुरू किया। कार्रवाई की खबर मिलते ही कई वाहन चालक रास्ता बदलते नजर आए, जबकि कुछ चालक अपने वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए।
संयुक्त टीम ने जिले के अलग-अलग मार्गों पर संदिग्ध वाहनों की जांच की और उनके दस्तावेजों का मिलान किया। इसी दौरान एक हाइवा वाहन ऐसा मिला, जिसमें लगा ट्रांजिट पास (TP) बुरहानपुर जिले का था। शुरुआती जांच में यह मामला सामान्य नहीं लगा, क्योंकि बुरहानपुर और सिंगरौली के बीच लगभग 900 किलोमीटर की दूरी है। इसी वजह से अब पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
अवैध रेत खनन जांच में सामने आया बड़ा सवाल
जांच के दौरान मिले ट्रांजिट पास ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या वाहन में लगा टीपी वैध था या फिर दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ी की गई थी। यदि किसी दूसरे जिले के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर खनिज परिवहन किया जा रहा था, तो यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं बल्कि बड़े नेटवर्क की ओर भी इशारा कर सकता है।
खनिज विभाग के अधिकारियों ने वाहन से जुड़े सभी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और रिकॉर्ड का मिलान शुरू कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है कि ट्रांजिट पास कब जारी हुआ था और उसका वास्तविक उपयोग किस परिवहन के लिए होना था। प्रशासन का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रांजिट पास खनिज परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। यदि इसका गलत इस्तेमाल किया जाता है तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ अवैध खनन को भी बढ़ावा मिलता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में विस्तृत जांच जरूरी मानी जाती है।
सिंगरौली में रेत माफियाओं पर सख्ती
जिला खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल ने स्पष्ट किया है कि सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस अधीक्षक षियाज के.एम. ने भी कहा है कि अवैध खनन और परिवहन में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले में सक्रिय रेत माफियाओं के बीच बेचैनी बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में जांच अभियान और तेज किया जाएगा तथा संदिग्ध वाहनों की लगातार जांच होगी। इसके अलावा खनिज परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को समय रहते पकड़ा जा सके।
जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में दस्तावेजों के दुरुपयोग या संगठित नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो यह प्रदेश में अवैध रेत कारोबार से जुड़े बड़े खुलासों की शुरुआत हो सकती है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रहा है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।






