सिंगरौली: 24 घंटे में दूसरा बड़ा अपराध, हत्या से दहशत, सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्यशैली पर उठे सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या की सनसनीखेज वारदात जब सिंगरौली में आईजी, डीआईजी सहित मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना भी मौजूद थे ।
Singrauli Murder

Singrauli Murder

सिंगरौली जिले में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोतवाली वैढ़न क्षेत्र में दिनदहाड़े बैंक ऑफ महराष्ट्र में करोड़ों की डकैती की घटना को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि उसी क्षेत्र में एक और सनसनीखेज वारदात सामने आ गई। अज्ञात हमलावरों ने रमेश शाह नामक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी, जबकि एक महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया है।

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों में आक्रोश साफ देखा जा रहा है और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिले में उस समय आईजी, डीआईजी सहित मध्यप्रदेश के डीजीपी की मौजूदगी थी। बावजूद इसके, अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे लगातार बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

घायल महिला की हालत नाजुक 

बाते जा रहा है कि हमलावरों ने सुनियोजित तरीके से इस घटना को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए। घायल महिला को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में टीमें गठित की गई हैं, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने पुलिस की मुस्तैदी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लगातार दो बड़ी वारदातें, पुलिस की सुरक्षा पर सवाल 

एक के बाद एक हो रही घटनाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर अपराधियों में पुलिस का खौफ क्यों नहीं रह गया। बड़े अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की घटनाएं होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन आमजन के मन में डर और गुस्सा दोनों साफ नजर आ रहा है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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