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स्पोर्ट्स बिल का BCCI पर नहीं होगा कोई असर, RTI के दायरे में नहीं लिया जाएगा, जानिए वजह

Written by:Rishabh Namdev
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बीसीसीआई को अभी आरटीआई के दायरे में नहीं लिया जाएगा। नए बिल का बोर्ड पर कोई असर नहीं होगा। दरअसल, बीसीसीआई सरकार से कोई भी अनुदान प्राप्त नहीं करता है। चलिए इस खबर में जानते हैं कि आखिर क्या कारण है, जिसके चलते बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में नहीं लिया जा सकता है।
स्पोर्ट्स बिल का BCCI पर नहीं होगा कोई असर, RTI के दायरे में नहीं लिया जाएगा, जानिए वजह

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल में खेल मंत्रालय द्वारा संशोधन किया गया है। अब भी बीसीसीआई आरटीआई के दायरे में नहीं आएगा। दरअसल, खेल मंत्रालय द्वारा उन खेल संगठनों को इसके दायरे में लिया गया है, जिन्हें सरकारी अनुदान और सहायता प्राप्त होती है। बता दें कि खेल मंत्रालय से बीसीसीआई को कोई भी अनुदान प्राप्त नहीं होता है। हालांकि, कई बार इसे आरटीआई के अधिकार के दायरे में लाने की मांग की गई है।

दरअसल 23 जुलाई को खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025 को पेश किया था, जिसमें उन्होंने देश में खेलों के विकास पर जोर देने की बात कही थी। इसके लिए नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बॉडी, नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड, नेशनल खेल इलेक्शन पैनल और नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल बनाने का प्रावधान रखा गया है।

किन संस्थाओं को RTI के दायरे में लिया जा सकता है?

इसके अलावा, इस बिल को GPC में भेजने की मांग भी की गई है। दरअसल, जुलाई में पेश किए गए इस बिल में यह कहा गया है कि जो भी मान्यता प्राप्त खेल संगठन हैं, उन्हें इस अधिनियम/नियम के तहत अपने कार्य, कर्तव्य और शक्तियों के प्रयोग के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के चलते एक सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाएगा। दरअसल, संशोधित प्रावधान में यह जानकारी दी गई कि सिर्फ वही संस्थाएं आरटीआई के दायरे में ली जाएंगी, जो सरकारी अनुदान प्राप्त करती हैं, यानी जो सरकार से पैसा लेकर संचालित की जाती हैं, उन्हें ही आरटीआई के दायरे में लिया जाएगा।

क्यों नहीं लिया जा सकता BCCI को RTI के दायरे में?

वहीं बीसीसीआई की बात की जाए, तो बीसीसीआई सरकार से अनुदान प्राप्त नहीं करती, जिसके चलते उसे आरटीआई के दायरे में नहीं लिया जा सकता है। इसमें सिर्फ पैसों की मदद शामिल नहीं है, बल्कि अगर किसी खेल संगठन को इवेंट करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर या कोई और सुविधा भी दी जाती है, तो उसे आरटीआई के दायरे में लाया जा सकता है। लेकिन बीसीसीआई को लेकर कन्फ्यूजन बनी हुई है। बोर्ड द्वारा आरटीआई के दायरे में आने का विरोध किया गया है। बोर्ड अन्य राष्ट्रीय खेल महासंघों के विपरीत सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं है।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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