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National Sports Day 2025: जब हिटलर ने मेजर ध्यानचंद को जर्मनी ले जाने की ठानी, मिला ऐसा जवाब जो इतिहास बन गया

Written by:Bhawna Choubey
Published:
National Sports Day 2025 आज पूरे देश में मेजर ध्यानचंद की याद में मनाया जा रहा है। हॉकी के इस जादूगर ने अपने खेल से भारत का नाम रोशन किया और हिटलर तक को अपने हुनर से हैरान कर दिया। जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े वो किस्से जो आज भी प्रेरणा देते हैं।
National Sports Day 2025: जब हिटलर ने मेजर ध्यानचंद को जर्मनी ले जाने की ठानी, मिला ऐसा जवाब जो इतिहास बन गया

भारत में 29 अगस्त को हर साल (National Sports Day) मेजर ध्यानचंद की जयंती पर मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ खेल प्रेमियों के लिए नहीं बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है। हॉकी में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा गया।

ध्यानचंद का खेल ऐसा था कि दर्शक कहते थे गेंद उनकी हॉकी से चिपक जाती है। बर्लिन ओलंपिक 1936 में तो जर्मनी का पूरा स्टेडियम खड़ा होकर उनकी हॉकी की जादूगरी देख रहा था। वहीं पर जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने उन्हें अपनी सेना में ऊंचा पद ऑफर किया, लेकिन ध्यानचंद ने देशभक्ति को सबसे ऊपर रखते हुए उस ऑफर को ठुकरा दिया। यही कारण है कि आज भी वे सिर्फ खिलाड़ी नहीं बल्कि एक प्रेरणा माने जाते हैं।

ध्यानचंद का शुरुआती जीवन और हॉकी से रिश्ता

मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ। पिता खुद भी सेना में हॉकी खेलते थे, इसलिए बचपन से ही ध्यानचंद का झुकाव इस खेल की तरफ हो गया। शुरुआत में उन्हें ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन सेना में भर्ती होने के बाद हॉकी उनका जुनून बन गई।

उनका नाम ध्यानचंद इसलिए पड़ा क्योंकि वह रात को चांदनी में प्रैक्टिस करते थे। लोग कहते थे कि जब चांद निकलेगा, तब ध्यान खेलते नजर आएंगे। धीरे-धीरे उनकी हॉकी स्टिक और गेंद का रिश्ता ऐसा बन गया कि दुनिया उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगी।

ओलंपिक में भारत की पहचान बने ध्यानचंद

1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में ध्यानचंद ने भारत को हॉकी में गोल्ड दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद 1932 लॉस एंजेलिस और 1936 बर्लिन ओलंपिक में भी उन्होंने भारत को गोल्ड जिताया। खासकर 1936 में जर्मनी के खिलाफ फाइनल मैच में भारत ने 8-1 से जीत दर्ज की, जिसमें ध्यानचंद ने 3 गोल किए।

उनके खेल को देखकर विदेशी अखबारों ने लिखा, हॉकी का यह खिलाड़ी इंसान नहीं बल्कि जादूगर है। ध्यानचंद ने कुल मिलाकर 400 से ज्यादा इंटरनेशनल गोल किए और भारत को तीन बार ओलंपिक चैंपियन बनाया। यह उपलब्धि आज भी भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

भारत रत्न की मांग

मेजर ध्यानचंद की उपलब्धियों को देखते हुए आज भी खेल प्रेमी उन्हें भारत रत्न देने की मांग करते हैं। हालांकि, 1956 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी जिंदगी भारत के हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है।

नेशनल स्पोर्ट्स डे का महत्व

भारत सरकार ने उनकी जन्मतिथि को नेशनल स्पोर्ट्स डे घोषित किया। इस दिन देशभर में खेलों को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम होते हैं और खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाता है। यह दिन याद दिलाता है कि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक हैं।

ध्यानचंद की प्रेरणा

आज भी भारतीय हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद को अपना आदर्श मानते हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि खेल अनुशासन, देशभक्ति और समर्पण का प्रतीक है। मेजर ध्यानचंद ने दुनिया को दिखाया कि भारत केवल खेलता ही नहीं, बल्कि दिलों को जीतता है।