
इन दिनों इंटरनेट पर Gemini के अलग-अलग ट्रेंड छाए हुए हैं। लोग अपनी तस्वीर AI मॉडल पर अपलोड कर खुद को अलग-अलग अवतार में देख रहे हैं और जमकर तस्वीर डाउनलोड कर रहे हैं। Google AI Gemini Nano का ये ट्रेंड तस्वीर अपलोड होते ही आपका पूरा अवतार चेंज कर साड़ी में आपके सामने पेश कर देता है।
Nano Banana 3D Trend से शुरू हुआ तस्वीर बनाने का यह सिलसिला अब साड़ी ट्रेंड तक तो पहुंच चुका है लेकिन कहीं ना कहीं प्राइवेसी का खतरा भी लोगों को महसूस हो रहा है। कुछ साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI मॉडल्स पर तस्वीरें अपलोड करना एक बड़ा रिस्क हो सकता है। इससे किसी व्यक्ति का डाटा दुरुपयोग किया जा सकता है। चलिए जान लेते हैं कि प्राइवेसी को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
क्या डाटा से हो सकती है समस्या?
बायोमेट्रिक से ट्रेनिंग
जब हम एक फोटो अपलोड करते हैं तो वह AI मॉडल के लिए ट्रेनिंग डाटा बन जाता है। हमारे चेहरे के हाव-भाव, नैन नक्ष और छोटी-छोटी डिटेल्स से मॉडल प्रैक्टिस करते हैं। इसका मतलब यह है कि अपनी फोटो को अपलोड कर हमने बिना सहमति दिए बायोमेट्रिक जानकारी AI के साथ शेयर कर दी है। इसके बदले में आपको कुछ मिलने भी नहीं वाला है।
कितनी है असुरक्षा
इन प्लेटफार्म पर अपनी तस्वीर अपलोड करना कितना सुरक्षित और असुरक्षित है अगर इसकी बात करें तो यह जान लीजिए कि बायोमैट्रिक डाटा स्थाई होता है। अगर एक बार आपकी तस्वीर या फिर डाटा चोरी हो गया है तो उसे बदला नहीं जा सकता। इसका दुरुपयोग प्रोफाइलिंग या फिर डीप फेक वीडियो जैसी चीजों के लिए हो सकता है। आपने तो एक तस्वीर अपलोड की है लेकिन यह बहुत सारे अलग-अलग सिस्टम का हिस्सा बन सकती है इसके बारे में आपको पता भी नहीं होता। हम ट्रेंड फॉलो करने के चक्कर में या फिर मजेदार दिख रही चीज को अपनाने के लालच में फोटो अपलोड तो कर देते हैं लेकिन यह आने वाले कल को बुरे सपने में बदल सकता है।
Gemini पर प्राइवेसी की सुरक्षा कैसे करें
व्यक्तिगत तस्वीर ना करें अपलोड
जब हम अपनी तस्वीर किसी AI मॉडल पर अपलोड करते हैं। उस तस्वीर पर हमारा कंट्रोल खो जाता है। यह तस्वीर कहां और किस तरह से स्टोर हो रही है यह हमें नहीं पता होता। हालांकि, जितने प्लेटफार्म होते हैं वह सुरक्षा का वादा तो जरूर करते हैं लेकिन डाटा लीक और हैकिंग जैसी घटनाएं तो आम है। ऐसे में हमारा डाटा कितना सुरक्षित रहेगा इस बात पर विश्वास कर पाना मुश्किल है। आपकी निजी तस्वीरें कभी भी इन प्लेटफार्म पर अपलोड ना करें। इससे सुरक्षा का खतरा हो सकता है।
Prompt से बढ़ाएं सुरक्षा
बदलते हुए फैशन और ट्रेंड्स के साथ आजकल असली और नकली की पहचान करना भी मुश्किल हो गया है। कई ऐसे नामी चेहरे हैं, जिनके डीप फेक फोटो और वीडियो के मामले हमारे सामने आए हैं। ऐसे में यह तो जाहिर है कि केवल एक तस्वीर देकर AI से कुछ भी करवाना आसान है। वैसे हम ये नहीं कहते कि AI के ये ट्रेंड आपकी तस्वीर का दुरुपयोग ही करेंगे। लेकिन अपनी प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए जब आप कोई फोटो या वीडियो अपलोड कर रहे हैं। उसका प्रॉम्ट डालते समय आप कुछ चीजों का ध्यान रख सकते हैं। इसमें आपको वाटर मार्क और कॉपीराइट जैसी चीज डालनी होगी ताकि इसका कहीं और इस्तेमाल न किया जा सके। इसी के साथ मशीन पर भरोसा करने की जगह अपने परिवार और दोस्तों पर विश्वास रखें। आप जो तस्वीर AI की मदद से बनवा रहे हैं उन्हें थोड़ी मेहनत कर खुद भी क्लिक करवा सकते हैं।
गूगल का क्या कहना
सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड के बीच लोगों के मन में प्राइवेसी को लेकर कई सारे सवाल हैं। इस पर गूगल का कहना है कि यहां पर अपलोड की गई फोटो सेव है। जब फोटो अपलोड की जाती है तो इसे गूगल के सर्वर पर प्रक्रिया किया जाता है। बिना परमिशन के लिए किसी थर्ड पार्टी को नहीं दी जाती और ना ही ट्रेनिंग के लिए इसका इस्तेमाल होता है। कंपनी के मुताबिक यह डाटा तभी उपयोग होता है जब इसकी परमिशन दी जाती है। ये भी बताया गया है कि Gemini टूल यूरोप के GDPR और अमेरिका है CCPA जैसे डेटा रूल्स को फॉलो करता है।
10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

