मध्य प्रदेश के बुडेरा थाना क्षेत्र के ग्राम नन्ही टेहरी में सरकारी राशन वितरण से जुड़ी एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गरीब परिवारों को दिए गए गेहूं की सीलबंद बोरी खोलने पर उसमें से किसी जानवर की खोपड़ी और सूखी हड्डियां मिलने का दावा किया गया है। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। मामला सामने आने के बाद जिला खाद्य विभाग ने संबंधित उचित मूल्य की दुकान को सील कर दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
सरकारी राशन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस तरह का मामला सामने आने से ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ गई हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
राशन की बोरी खोलते ही उड़ गए होश
जानकारी के अनुसार, नन्ही टेहरी की महिला बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित से लक्ष्मणपुरा निवासी कोमल लोधी और जागेश्वर लोधी को सरकारी गेहूं दिया गया था। दोनों के हिस्से का अनाज अलग-अलग तौलने के बजाय उन्हें 50 किलो की एक सीलबंद बोरी देकर घर ले जाने को कहा गया। जब परिवार ने घर पहुंचकर बोरी खोली तो गेहूं के बीच किसी जानवर की पुरानी खोपड़ी और हड्डियां दिखाई दीं। यह देखकर परिवार के लोग घबरा गए और तुरंत वापस राशन दुकान पहुंचे।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने जब सेल्समैन को पूरी बात बताई तो उसने मामले को दबाने की कोशिश की और दूसरी बोरी देकर बात खत्म करने का प्रयास किया। हालांकि तब तक गांव में यह खबर फैल चुकी थी। सूचना मिलने पर बुड़ेरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित बोरी के साथ उसमें मिले अवशेषों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। प्रशासन ने भी मामले को गंभीर मानते हुए खाद्य विभाग की टीम को जांच के निर्देश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह लापरवाही भंडारण के दौरान हुई या वितरण प्रक्रिया में।
राशन की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इस घटना के बाद गांव के लोगों ने राशन वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस उचित मूल्य की दुकान से लंबे समय से खराब गुणवत्ता वाला गेहूं और अन्य खाद्यान्न मिल रहा था। कई बार अनाज में बदबू, घुन, मिट्टी और अन्य अशुद्धियां मिलने की शिकायत अधिकारियों से की गई, लेकिन समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब जब बोरी से जानवर का कंकाल मिलने जैसी घटना सामने आई है तो लोगों का भरोसा सरकारी राशन व्यवस्था पर और कमजोर हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खाद्यान्न का सुरक्षित भंडारण और नियमित गुणवत्ता जांच बेहद जरूरी है। यदि गोदामों की साफ-सफाई, पैकिंग और परिवहन की सही निगरानी न हो तो इस तरह की घटनाएं सामने आ सकती हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा पैदा हो सकता है। खाद्य विभाग ने फिलहाल दुकान को सील कर दिया है और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे क्षेत्र में सरकारी राशन की गुणवत्ता की विशेष जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गुणवत्ता और निगरानी को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।






