अधिकारी उड़ा रहे कोरोना गाइड लाइन की धज्जियां, न मास्क और न ही सोशल डिस्टेंसिंग

अधिकारी उड़ा रहे कोरोना गाइड लाइन की धज्जियां, न मास्क और न ही सोशल डिस्टेंसिंग

टीकमगढ़, आमिर खान। मध्यप्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण (Corona Infection) को लेकर सभी से सुरक्षित रहने और कोरोना गाइड लाइन (Corona Guide Line) का पालन करने की अपील की जा रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) खुद रोज अपील कर रहे हैं कि मास्क लगाएं , सोशल डिस्टेंसिंग रखें लेकिन टीकमगढ़ के लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मुख्यमंत्री के निर्देशों से कोई फर्क नहीं पड़ता वे ना मास्क लगाते हैं और ना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं।

टीकमगढ़ जिले में बीते चार दिनों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की बढ़ती संख्या और मरीजों की मौत के बाद कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी ने कोरोना कर्फ्यू लगाने के आदेश जारी किये साथ ही 15 और 16 अप्रैल को सभी कार्यालय बंद रखने के आदेश दिए। आदेश के तहत सभी को मास्क लगाने व सोशल डिस्टेंस का पालन करने के लिए कहा गया था, लेकिन कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए ना सिर्फ लोक निर्माण विभाग कार्यालय खोला गया बल्कि  वहां कामकाज के साथ कोरोना के लिए बनाई गई सरकार की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई गई। यहां मौजूद कर्मचारियों के मुंह पर न मास्क था और न ही सोशल डिस्टेंस का पालन हो रहा था।

जब लोक निर्माण विभाग (PWD) के कर्मचारियों से कार्यालय खुले होने का सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि जरूरी काम के लिये कार्यालय खोला गया है। इसके साथ जब उनसे मास्क और सोशल डिस्टेंस की बात पूछी तो उन्होंने कहा कि आपने हमें मास्क लगाने का मौका कहां दिया और फोटो क्लिक कर ली। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना जैसी गंभीर बीमारी के लिए जहां सरकार सख्त है, तो वहीं टीकमगढ़ का लोक निर्माण कार्यालय कितना लापरवाह है। फिलहाल इस लापरवाही पर इनके विरुद्ध क्या कार्यवाही होगी या फिर आगे से ये ऐसी गल्ती न करेंगे ये देखने वाली बात होगी।

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उधर पूरे मामले पर कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी का कहना है कि कार्यालय किसी अति आवश्यक कार्य के लिए खोला होगा, अगर मास्क और सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हुआ है, तो इसे दिखवाता हूँ।  जो नियम आम जनता के लिए हैं वही सबके लिए हैं  लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।  ।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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