टीकमगढ़ के सापौन उप स्वास्थ्य केंद्र में कलेक्टर के औचक निरीक्षण ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी। दरअसल निरीक्षण के दौरान CHO रितु अहिरवार महिला मरीज का BP नहीं ले सकीं। कलेक्टर ने मौके पर उन्हें प्रक्रिया समझाई और ग्रामीणों की शिकायतों के बाद लापरवाही पर नोटिस जारी करने की बात कही।
वहीं निरीक्षण के दौरान उन्होंने CHO की शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण से जुड़े सवाल भी पूछे, ताकि यह समझा जा सके कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में ऐसी स्थिति क्यों बनी।
सापौन उप स्वास्थ्य केंद्र में निरीक्षण के दौरान क्या मिला?
दरअसल निरीक्षण के दौरान सिर्फ ब्लड प्रेशर जांच का मामला ही सामने नहीं आया, बल्कि ग्रामीणों ने भी स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर कई शिकायतें रखीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र कई बार तय समय पर नहीं खुलता, जिससे छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी उन्हें दूसरे गांव या अस्पताल जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना था कि समय पर डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी नहीं मिलने से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कलेक्टर ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके पर मौजूद अधिकारियों से जवाब मांगा और स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध दवाइयों, रिकॉर्ड और सुविधाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीणों के लिए पहली स्वास्थ्य सेवा होते हैं, इसलिए यहां की व्यवस्था मजबूत रहना जरूरी है। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए दिए सख्त निर्देश
निरीक्षण के बाद कलेक्टर विवेक कुमार श्रोतिय ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित सेवाएं सुनिश्चित की जाएं और मरीजों को बुनियादी इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने CHO की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए लापरवाही के मामले में नोटिस जारी करने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों को अपने दायित्वों के अनुरूप प्रशिक्षित और सक्षम होना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने क्षेत्र की राशन दुकान और आंगनबाड़ी केंद्र का भी जायजा लिया। उन्होंने वहां लाभार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं, रिकॉर्ड और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।






