उज्जैन के इस मंदिर में तिथि से मनाए जाते हैं राष्ट्रीय पर्व, यहां 11 अगस्त को होगा स्वतंत्रता दिवस का आयोजन

देश भर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाएगा। लेकिन उज्जैन में एक मंदिर ऐसा है, जहां आजादी का पर्व तारीख से नहीं बल्कि तिथि से मनाया जाता है। चलिए आपको इस बारे में बता देते हैं।
Bade ganesh mandir

उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर में हर त्यौहार सबसे पहले मनाया जाता है यह तो हम सभी जानते हैं। होली हो या दिवाली यहां हर त्यौहार का आयोजन सबसे पहले किया जाता है। लेकिन उज्जैन में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को नहीं बल्कि तिथि के मुताबिक मनाया जाता है।

हम बात कर रहे हैं उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर की जहां आजादी का उत्सव तारीख से नहीं बल्कि तिथि से मनाया जाता है। इस साल यहां स्वतंत्रता दिवस 11 अगस्त को मनाया जाएगा। वैदिक तिथि के मुताबिक जिस दिन भारत को आजादी मिली थी। उस दिन श्रावण कृष्ण की चतुर्दशी तिथि थी। इस वर्ष ये तिथि 11 तारीख को है इसलिए स्वतंत्रता दिवस का आयोजन चार दिन पहले मंदिर में किया जाएगा।

बड़े गणेश में 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस

11 अगस्त को मंदिर में बड़े गणेश का अभिषेक पूजन कर गणपति स्तोत्र के सहस्त्र पाठ किए जाएंगे। इसके बाद ध्वजारोहण कर भारत माता की पूजा और राष्ट्रगान किया जाएगा। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। देश भक्ति गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रसाद वितरण किया जाएगा।

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तिथि के अनुसार राष्ट्रीय पर्व

बड़े गणेश मंदिर में 15 अगस्त, 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्व और महापुरुषों की जयंती तिथि अनुसार मनाने की परंपरा वर्षो से चली आ रही है। हिंदी दिवस भी यहां तिथि के अनुसार मनाया जाता है। इसके पीछे चली आ रही मान्यता के मुताबिक सनातन धर्म परंपरा को मानने वाले हिंदू दिन की शुरुआत पंचांग के अनुसार करते हैं। वार  के अनुसार व्रत रखा जाता है और संबंधित देवी देवताओं की उपासना की जाती है। व्यक्ति की कुंडली भी पंचांग के अनुसार योग और नक्षत्र देखकर मनाई जाती है। यही वजह है कि राष्ट्रीय पर्व भी यहां तिथि के मुताबिक मनाए जाते हैं।

बता दें कि इस मंदिर के संस्थापक विश्वप्रख्यात ज्योतिष पंडित नारायण व्यास ने ही आजादी के शुभ दिन की गणना की थी। 15 अगस्त को जब देश आजाद हुआ उस समय विक्रम संवत 2005 के श्रावण के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी। यही वजह की आज भी यहां इस परंपरा को निभाया जाता है।

Diksha Bhanupriy
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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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