जुगाड़ की नाव पलटी, नदी के पार शादी में जा रहे 10 लोग डूबे, मच गई चीख पुकार

जुगाड़ की नाव पलटी, नदी के पार शादी में जा रहे 10 लोग डूबे, मच गई चीख पुकार

उज्जैन, योगेश कुल्मी| प्रदेश में आज भी कई जगह नदी पार (Rever Cross) करने जुगाड़ ही काम आती है, जो कई बार बड़े हादसे का कारण भी बन जाती है| बड़नगर की चामला नदी में शनिवार को ऐसी ही एक जुगाड़ की नाव पलट (Boat Overturned) गई| नदी के उस पार शादी (Marriage Function) में शामिल होने जा रहे नाव पर सवार 10 लोग डूब गए| आनन फानन में नदी किनारे खेतों में काम कर रहे लोगों ने नदी में छलांग लगाकर सभी को बचा लिया| इस तरह एक बड़ा हादसा होते होते बच गया, घटना के बाद गांव वालों ने आंदोलन की चेतावनी दी है, क्योंकि इस तरह के हादसे पहले भी यहां होते रहे हैं|

जानकारी के मुताबिक, बड़नगर तहसील के ग्राम सारोला में चामला नदी पार करने के लिए लोगों द्वारा जुगाड़ नाव बनाई थी। इसी नाव पर सवार होकर कुछ लोग दूसरे किनारे पर बसे शंभूसिंह के घर शादी में शामिल होने के लिए जा रहे थे। जुगाड़ की नाव कुछ ही दूर पहुंची और भार अधिक होने के चलते पलट गई| नाव पलटते ही चीख पुकार मच गई|

नाव पलटने से इसमें सवार मोहन बाई पत्नी हेमसिंह उम्र 55 वर्ष, बालक हर्ष पुत्र प्रकाश छह वर्ष, भानुप्रताप पुत्र नरेंद्र सिंह, शंकरलाल, गिरधारीलाल, राजेंद्र सिंह, लाल सिंह, सजन सिंह, टीकम सिंह व मोहित डूबने लगे। इन्हें डूबते देख आसपास खेतों में काम कर रहे लोग नदी में कूद गए और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया| हालाँकि एक महिला और एक बच्चे के मुंह में पानी भर गया. दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया|

पुलिया की पुरानी मांग, क्या बड़े हादसे के इन्तजार में है शासन प्रशासन ?
घटना के बाद नदी पर पुलिया बनाने की मांग एक बार फिर उठने लगी है| ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है| बताया जाता है कि अधिकतर ग्रामवासियों के खेत नदी के दूसरे किनारे पर हैं। नदी के दूसरी ओर जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, इसलिए ग्रामीण प्रतिदिन इस जुगाड़ की नाव से जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। लोग यहां पुलिया बनाने की मांग कई बार कर चुके हैं, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई| सवाल उठता है क्या प्रशासन यहां बड़े हादसे के इन्तजार में है?

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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