धार्मिक नगरी उज्जैन में इन दिनों नगर पूजा को लेकर विवाद देखने को मिल रहा है। दरअसल महाकाल सेना ने अखाड़ा परिषद को पत्र भेजकर पूछा है कि चैत्र नवरात्रि में होने वाली नगर पूजा का वेद-शास्त्रों में कोई आधार है या नहीं। वहीं महाकाल सेना की ओर से भेजे गए स्मरण-पत्र में कहा गया है कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर नगर पूजा का उल्लेख किसी भी प्राचीन धार्मिक ग्रंथ में नहीं मिलता है। दरअसल संगठन का कहना है कि अगर किसी नई परंपरा को बिना धार्मिक आधार के शुरू किया जाता है तो इससे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है।

दरअसल इस मामले में स्थानीय पंडे-पुजारियों ने भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि धार्मिक परंपराओं से जुड़ी गतिविधियों को शास्त्रों के अनुसार ही होना चाहिए। इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर नगर पूजा आयोजित करने की चर्चा सामने आई।
महाकाल सेना ने अखाड़ा परिषद को पत्र भेजा
वहीं इसके बाद महाकाल सेना ने इस पर आपत्ति जताते हुए अखाड़ा परिषद को पत्र भेजा है। दरअसल संगठन का कहना है कि उन्होंने पहले भी इसी विषय पर सवाल उठाए थे लेकिन तब कोई जवाब नहीं मिला था। महाकाल सेना के संरक्षक महेश पुजारी के अनुसार पारंपरिक तौर पर नगर पूजा का आयोजन आश्विन नवरात्रि की अष्टमी पर होता है। इस आयोजन में प्रशासन की भी भागीदारी रहती है और इसे तय विधि-विधान के साथ किया जाता है। उनका कहना है कि चैत्र नवरात्रि में इस तरह की पूजा का कोई उल्लेख नहीं मिलता, इसलिए इस नई परंपरा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जानिए इसे लेकर क्या बोले महाकाल सेना के प्रमुख राम शर्मा?
वहीं संगठन का मानना है कि धार्मिक परंपराओं में बदलाव या नई परंपरा शुरू करने से पहले समाज और धर्माचार्यों के बीच खुली चर्चा होनी चाहिए। अगर बिना सहमति के कोई आयोजन किया जाता है तो इससे श्रद्धालुओं के बीच अलग-अलग राय बन सकती है। इसी वजह से अखाड़ा परिषद से स्पष्ट जवाब मांगा गया है ताकि स्थिति साफ हो सके। दरअसल महाकाल सेना के प्रमुख राम शर्मा ने कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष से उम्मीद है कि वे इस मामले में साफ राय देंगे। उनका कहना है कि परिषद के पदाधिकारी सनातन परंपराओं के जानकार माने जाते हैं, इसलिए समाज उनके जवाब का इंतजार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती है तो समाज को तय करना पड़ेगा कि ऐसी परंपराओं को स्वीकार किया जाए या नहीं।
हालांकि इस मामले में जब अखाड़ा परिषद से जुड़े संत रविंद्र पूरी महाराज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह विवाद अनावश्यक रूप से खड़ा किया जा रहा है। उनके मुताबिक कुछ लोग सिर्फ चर्चा में आने के लिए इस तरह के सवाल उठा रहे हैं।






