उज्जैन जिले की झारड़ा तहसील का छोटा सा गांव लोटिया जुनार्दा। यहां रहने वाले किसान हरि सिंह के लिए बीते नौ महीने इंतजार और संघर्ष में गुजर गए। मार्च महीने में उनके घर से दो भैंस और एक बछड़ा चोरी हो गए थे। शुरुआत में किसान को भरोसा था कि पुलिस और प्रशासन समय रहते कार्रवाई करेंगे, लेकिन यह भरोसा धीरे-धीरे कमजोर पड़ता चला गया।
मार्च की रात हुई थी चोरी
किसान हरि सिंह के अनुसार, मार्च महीने की एक रात उनके घर से दो भैंस और एक बछड़ा चोरी हो गया। सुबह जब पशु नहीं दिखे, तो परिवार और गांव में हड़कंप मच गया। आसपास के इलाकों में खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चोरी की घटनाएं आम हैं, लेकिन किसान के लिए यह केवल नुकसान नहीं, बल्कि आजीविका पर सीधा असर होता है। दूध बिक्री ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन था।
थाना, अधिकारी और हेल्पलाइन हर जगह शिकायत
घटना के बाद हरि सिंह ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच का भरोसा दिया। इसके बाद किसान ने कई बार थाने के चक्कर लगाए और अधिकारियों से भी मुलाकात की। हर बार यही जवाब मिला कि मामले की जांच चल रही है। न्याय की उम्मीद में किसान ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत क्रमांक मिलने के बावजूद, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। नौ महीने बीत जाने के बाद भी न तो चोरी हुए पशुओं का पता चला और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी।
कार्रवाई न होने से बढ़ी निराशा
हरि सिंह का कहना है कि उन्होंने एक आम नागरिक के तौर पर उपलब्ध सभी कानूनी और प्रशासनिक रास्ते अपनाए। लेकिन लगातार इंतजार के बावजूद जब कोई नतीजा नहीं निकला, तो निराशा बढ़ती चली गई। उनका कहना है कि लंबे समय तक कार्रवाई न होने से किसान मानसिक और आर्थिक दबाव में आ जाता है।
शनि मंदिर पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
जब प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं दिखा, तो किसान उज्जैन के शनि देव मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिर प्रबंधन व्यवस्था समिति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें चोरी हुए पशुओं की बरामदगी, दोषियों पर कार्रवाई और क्षेत्र में बढ़ती पशु चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। किसान का कहना है कि यह कदम उन्होंने मजबूरी में उठाया, ताकि उनकी आवाज सुनी जा सके।






