उज्जैन में गुड़ी पड़वा के दिन महाकाल मंदिर के शिखर पर ब्रह्मध्वज फहराया जाएगा। दरअसल वैदिक विधि से होने वाला यह आयोजन हर साल की तरह इस बार भी खास रहेगा और पूरे शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बनाएगा। बता दें कि गुड़ी पड़वा को हिंदू नववर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। उज्जैन में इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
दरअसल महाकालेश्वर मंदिर में इस दिन ब्रह्मध्वज स्थापित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। मंदिर के शिखर पर विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण किया जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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परंपरा और आस्था का अनोखा संगम
दअरसल उज्जैन का महाकाल मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां की परंपराएं काफी खास मानी जाती हैं। गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मध्वज फहराने की परंपरा सदियों पुरानी है जो आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सृष्टि की शुरुआत इसी दिन हुई थी और भगवान महाकाल की प्रेरणा से ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसी वजह से ब्रह्मध्वज को नई शुरुआत और सृजन का प्रतीक माना जाता है।
गुड़ी पड़वा का दिन बेहद विशेष
वहीं महाकाल मंदिर के अलावा शहर के अन्य मंदिरों में भी ध्वज स्थापना की जाती है जिससे पूरे उज्जैन में एक साथ धार्मिक माहौल बन जाता है। यह आयोजन न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए खास होता है बल्कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है। बता दें कि गुड़ी पड़वा को हिंदू कैलेंडर के नए साल की शुरुआत माना जाता है जिसे विक्रम संवत का पहला दिन भी कहा जाता है। इस दिन को नई ऊर्जा, नई उम्मीद और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। दरअसल उज्जैन को ऐतिहासिक रूप से काल गणना का केंद्र माना जाता है और इसे सम्राट विक्रमादित्य की नगरी भी कहा जाता है। यही कारण है कि यहां नववर्ष का उत्सव और भी भव्य तरीके से मनाया जाता है।