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कौन बनेगा ज्ञानरत्न: उज्जैन से शुरू हुई अनोखी पहल, रामायण के जरिए युवाओं को संस्कारों से जोड़ने की कोशिश

Written by:Bhawna Choubey
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उज्जैन में राष्ट्रीय महाकाल सेना के स्थापना दिवस पर ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ प्रतियोगिता की शुरुआत की गई। रामायण आधारित इस ज्ञान मंच का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और सनातन परंपराओं से जोड़ना है। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए।

उज्जैन एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना है। बाबा महाकाल की नगरी में राष्ट्रीय महाकाल सेना के स्थापना दिवस के अवसर पर रामायण आधारित ज्ञान प्रतियोगिता ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ का शुभारंभ किया गया। इस आयोजन का मकसद केवल प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ना है। कार्यक्रम के दौरान भजन संध्या का आयोजन किया गया और प्रतियोगिता के पहले सीजन का टीजर भी लॉन्च किया गया।

आयोजकों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में युवा तेजी से आधुनिक जीवनशैली की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आदर्शों से जोड़ना बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ इस ज्ञान प्रतियोगिता की शुरुआत की गई है, जिसमें रामायण से जुड़े सवालों के जरिए प्रतिभागियों के ज्ञान की परीक्षा ली जाएगी।

रामायण आधारित ज्ञान प्रतियोगिता से युवाओं को मिलेगा नया मंच

‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ प्रतियोगिता को खास तौर पर बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार देश के अलग-अलग राज्यों से प्रतिभागियों ने इसमें रुचि दिखाई है। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों से भगवान श्रीराम, रामायण के पात्रों, घटनाओं और उनसे मिलने वाली सीख से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला भी सिखाती है। इसमें परिवार, समाज, कर्तव्य, नेतृत्व और रिश्तों को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं। ऐसे में ज्ञान आधारित प्रतियोगिताएं युवाओं को मनोरंजन के साथ सीखने का अवसर भी देती हैं। आयोजकों का कहना है कि आने वाले समय में इस मंच को और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना है ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इसमें शामिल हो सकें।

उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगी नई मजबूती

कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि उज्जैन केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का भी प्रमुख केंद्र है। महाकाल की नगरी से शुरू हुई यह पहल देशभर के युवाओं तक सकारात्मक संदेश पहुंचा सकती है। आयोजन के दौरान यह भी कहा गया कि संस्कृति से जुड़ाव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे विचार, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों को अपनाना भी इसका हिस्सा है।

आनंद यादव ने कार्यक्रम में कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी विरासत के बारे में जानने की जरूरत है। जब युवा अपनी संस्कृति और इतिहास को समझेंगे, तभी वे समाज में बेहतर भूमिका निभा सकेंगे। इस आयोजन में शामिल लोगों ने प्रतियोगिता को एक सकारात्मक कदम बताया। श्रद्धालुओं और युवाओं में भी इस पहल को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।

‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ के जरिए उज्जैन से शुरू हुआ यह प्रयास आने वाले समय में धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता का बड़ा मंच बन सकता है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह प्रतियोगिता युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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