इतिहासकार रामचंद्र गुहा द्वारा राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की योग्यता पर उठाए गए सवालों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। दरअसल कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुहा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देकर पलटवार किया है। यह विवाद राहुल गांधी के अनुभव और नेतृत्व क्षमता को लेकर दिए गए गुहा के हालिया बयान के बाद सामने आया है।
दरअसल रामचंद्र गुहा ने एक इंटरव्यू में राहुल गांधी की राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके पास प्रधानमंत्री बनने के लिए जरूरी प्रशासनिक अनुभव की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर अंतरराष्ट्रीय मामलों और विदेश नीति को संभालने के लिए जिस तरह की समझ और अनुभव की आवश्यकता होती है, वह राहुल गांधी में नजर नहीं आती। गुहा ने यह सवाल भी उठाया कि राजनीतिक विरासत और व्यक्तिगत शालीनता के अलावा राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त बनाने वाले कौन से विशेष गुण हैं।
बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिया उदाहरण
Come on, @Ram_Guha, this is a bit much. What experience did Barack Obama, a first-term Senator from Illinois, have in world affairs when he became President of the most powerful country on earth, while it was caught up in multiple global issues? For that matter, how much… https://t.co/Tyz2iisNXA
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) June 6, 2026
गुहा के इन बयानों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेतृत्व के लिए हमेशा पूर्व प्रशासनिक अनुभव जरूरी नहीं होता। थरूर ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तब उनके पास भी सीमित प्रशासनिक अनुभव था। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके पास अंतरराष्ट्रीय मामलों का विशेष अनुभव नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने वैश्विक स्तर पर नेतृत्व किया।
राहुल गांधी के बारे में क्या कहा?
दरअसल शशि थरूर ने अपने बयान में कहा कि राहुल गांधी पिछले एक दशक से अधिक समय से देश की एक प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और उनके पास राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेताओं से संवाद का व्यापक अनुभव है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के साथ अनुभवी सलाहकारों और अधिकारियों की पूरी टीम काम करती है, इसलिए नेतृत्व को केवल प्रशासनिक अनुभव के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।
वहीं शशि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े नेता की सफलता केवल उसके व्यक्तिगत अनुभव पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी दूरदृष्टि, टीम वर्क और जनता से जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को लेकर इस तरह के विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए और नेतृत्व क्षमता को व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत है।






