सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के सिलसिले में उज्जैन में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा के संत और महंत जुटे। दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण बैठक के समापन पर आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने किन्नर समाज के संतों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने फिल्मी गानों पर रील बनाने की प्रवृत्ति पर आपत्ति जताते हुए मर्यादा में रहने की नसीहत दी।
शिवांजलि गार्डन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से किन्नर संत शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी सिंहस्थ में किन्नर अखाड़ा की भूमिका, व्यवस्थाएं और धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा तैयार करना था।
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सोशल मीडिया पर मर्यादा का पाठ
बैठक के दौरान आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर किन्नर संतों की सक्रियता को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संतों को फिल्मी गीतों पर नृत्य कर रील बनाने से बचना चाहिए।
“यदि रील बनानी ही है तो भगवान के भजन पर बनाएं। फिल्मी गीतों पर नृत्य करना उचित नहीं है। सभी को मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।” — आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी
त्रिपाठी ने यह भी घोषणा की कि अखाड़ा जल्द ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च करेगा। इसके अलावा, सभी महामंडलेश्वर, श्री महंत और महंतों के लिए पहचान पत्र जारी किए जाएंगे और सभी एक समान तिलक लगाएंगे ताकि एकरूपता बनी रहे।
सिंहस्थ 2028 में जूना अखाड़े के साथ शाही स्नान
एक बड़ी घोषणा करते हुए त्रिपाठी ने बताया कि सिंहस्थ 2028 में किन्नर अखाड़ा, जूना अखाड़े के साथ शिप्रा नदी में पर्व स्नान करेगा। यह कदम दोनों अखाड़ों के बीच समन्वय और एकता को दर्शाता है। बैठक के समापन अवसर पर धार्मिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिसमें ब्रज धाम से आईं महामंडलेश्वर डॉ. वैष्णवी जगदम्बा गिरी ने “ॐ नमः शिवाय” भजन पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।
नए महामंडलेश्वर और श्री महंतों की नियुक्ति
इस कार्यक्रम में अखाड़े का विस्तार करते हुए नए पदाधिकारियों की घोषणा की गई। आचार्य महामंडलेश्वर ने चार नए महामंडलेश्वर नियुक्त किए:
- दिलीपनंद गिरी (सूरत, गुजरात)
- महाकालीनंद गिरी (तेलंगाना)
- कामाख्यानंद गिरी सीतारमण (राजस्थान)
- रेखानंद गिरी (प्रतापगढ़, उत्तरप्रदेश)
इसके अतिरिक्त, गुजरात की नंदिनीनंद गिरी, महाराष्ट्र की गणेशानंद गिरी तथा इंदौर की सुनहरी नंद गिरी, आकांक्षा नंद गिरी, गुंजन नंद गिरी और खुशीनंद गिरी को श्री महंत का पद दिया गया। बैठक के बाद देशभर से आए सभी संत अपने-अपने गंतव्यों के लिए रवाना हो गए।